कोलकाता: तृणमूल सरकार के दौरान दंडात्मक तबादले का सामना कर राज्य पुलिस में भेजे गए कोलकाता पुलिस के अधिकारियों की अब ‘घर वापसी’ हो सकती है। लालबाजार ने इन अधिकारियों को फिर से कोलकाता पुलिस में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस आयुक्त अजय नंदा ने कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा है।
13 मई को नवान्न भेजा गया प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक, 13 मई को यह प्रस्ताव नवान्न भेजा गया था। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को वापस लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि कोलकाता पुलिस के कई अहम विभागों में कर्मचारियों की कमी के कारण प्रशासन यह कदम उठाने पर मजबूर हुआ है।
82 अधिकारियों का हुआ था दंडात्मक तबादला
पूर्ववर्ती शासनकाल में कोलकाता पुलिस के कई अधिकारी तत्कालीन सत्तारूढ़ दल के निशाने पर आ गए थे। सजा के तौर पर कुल 82 अधिकारियों को राज्य पुलिस में ट्रांसफर कर दिया गया था। इनमें से कुछ अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 74 अधिकारी अब भी राज्य पुलिस में कार्यरत हैं।
दो बार वापसी का आदेश, लेकिन नहीं हो सकी वापसी
तृणमूल शासन के दौरान इन अधिकारियों को कोलकाता पुलिस में वापस लाने के लिए दो बार आदेश जारी किया गया था। हालांकि, ईडी द्वारा गिरफ्तार पूर्व डीसी रैंक के अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इन आदेशों को रद्द करा दिया था। पुलिस महकमे के एक वर्ग का मानना है कि इन अधिकारियों को राज्य पुलिस में भेजने के पीछे शांतनु सिन्हा विश्वास की अहम भूमिका थी। वहीं, यह भी माना जाता है कि जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी, वे प्रशासनिक और कानूनी मामलों में काफी अनुभवी और दक्ष थे।
कर्मचारी संकट बना बड़ी वजह
पुलिस आयुक्त द्वारा गृह विभाग को भेजे गए पत्र में साफ कहा गया है कि कोलकाता पुलिस में स्टाफ की भारी कमी है। थानों, गोयंदा विभाग, बटालियन और अन्य यूनिट्स को सुचारु रूप से चलाने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों की वापसी को जरूरी माना जा रहा है।
नई सरकार के आने के बाद बढ़ी हलचल
नई सरकार के सत्ता में आने के बाद इन अधिकारियों की वापसी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ी है। अब सबकी नजर गृह विभाग के फैसले पर टिकी है कि क्या वर्षों से ‘सजा’ झेल रहे इन अधिकारियों की आखिरकार कोलकाता पुलिस में वापसी होगी।