पिछले कुछ दशकों में भारतीय खानपान में बड़े बदलाव आए हैं। पारंपरिक अनाजों की जगह परिष्कृत खाद्य पदार्थों और सीमित खाद्य विविधता ने ले ली है। इसका परिणाम यह हुआ कि विटामिन बी12, विटामिन डी और आयरन जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तेजी से बढ़ी है। विशेष रूप से महिलाओं में आयरन की कमी और विटामिन डी की कमी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। ऐसे में केवल सप्लीमेंट्स ही नहीं, बल्कि उनके प्रभावी अवशोषण के उपाय भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
भारतीय शोधकर्ताओं ने किया महत्वपूर्ण अध्ययन
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र, सीलिएक सोसायटी ऑफ इंडिया और डॉ. डैंग्स लैब के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से एक पायलट रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल किया। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि क्या मोटे अनाज आधारित आहार विटामिन सप्लीमेंट्स के प्रभाव को बढ़ा सकता है। शोध में 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 54 प्रतिभागियों को शामिल किया गया और 60 दिनों तक उनके स्वास्थ्य संकेतकों का अध्ययन किया गया।
कैसे किया गया अध्ययन?
शोध के दौरान प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित किया गया। पहले समूह को केवल विटामिन डी, विटामिन बी12 और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स दिए गए। दूसरे समूह को इन्हीं सप्लीमेंट्स के साथ बाजरा, ज्वार, कोदो और अन्य मोटे अनाजों से भरपूर आहार भी दिया गया। अध्ययन की शुरुआत और समाप्ति पर रक्त परीक्षणों के माध्यम से विटामिन बी12, विटामिन डी, आयरन और हीमोग्लोबिन के स्तरों का मूल्यांकन किया गया।
महिलाओं में दिखा सबसे उल्लेखनीय फायदा
अध्ययन के परिणामों ने शोधकर्ताओं को भी चौंका दिया। जिन महिलाओं ने सप्लीमेंट्स के साथ मोटे अनाज आधारित आहार लिया, उनमें विटामिन बी12 और विटामिन डी के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। केवल सप्लीमेंट्स लेने वाली महिलाओं में विटामिन बी12 स्तर का मध्यम परिवर्तन 78 पीजी/एमएल था, जबकि मोटे अनाज के साथ सप्लीमेंट्स लेने वाली महिलाओं में यह बढ़कर 302 पीजी/एमएल तक पहुंच गया। इसी प्रकार विटामिन डी के स्तर में भी अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि मोटे अनाज शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।
क्या है इसके पीछे संभावित वैज्ञानिक कारण?
हालांकि शोधकर्ताओं ने माना है कि इस प्रभाव के पीछे का सटीक जैविक तंत्र अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि मोटे अनाजों में मौजूद फाइबर, खनिज और जैव सक्रिय तत्व आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद कर सकते हैं। स्वस्थ पाचन तंत्र और बेहतर आंत माइक्रोबायोम कई विटामिनों और खनिजों के प्रभावी उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए बड़े और दीर्घकालिक अध्ययनों की आवश्यकता होगी।
मोटे अनाज क्यों हैं विशेष?
बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज पोषण का समृद्ध स्रोत हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये रक्त शर्करा नियंत्रण, पाचन सुधार और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी सहायक माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से संतुलित मात्रा में मोटे अनाजों को भोजन का हिस्सा बनाने से पोषण संबंधी कई कमियों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
सेवन करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार मोटे अनाज स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, लेकिन इनका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए। भोजन में विविधता बनाए रखना आवश्यक है और केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर नहीं होना चाहिए। साथ ही विटामिन बी12 और विटामिन डी की गंभीर कमी होने पर चिकित्सकीय परामर्श और उचित सप्लीमेंट्स प्राथमिक उपचार बने रहते हैं। मोटे अनाज इन उपचारों के पूरक के रूप में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।