मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने या विरोध प्रदर्शन करने वाली नई पीढ़ी ('जनरेशन जेड' या Gen Z) को 'देशविरोधी' करार देना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि आज के युवा देश का भविष्य हैं और वे तर्कसंगत उत्तर चाहते हैं। इसके साथ ही संघ प्रमुख ने नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज पर चिंता जताई, शिक्षा को व्यापार न बनाने की अपील की और चीन-पाकिस्तान के साथ संबंधों पर भी विचार व्यक्त किए।
'आज की नई पीढ़ी ज्यादा ईमानदार, अंधभक्ति नहीं करती'
मोहन भागवत ने वर्तमान पीढ़ी की सराहना करते हुए कहा, "जब हम उनकी उम्र के थे, तो बड़ों की बातों को बिना सवाल किए मान लेते थे। लेकिन आज का Gen Z और Gen Alpha तर्कों पर बात करता है और बिना समझे किसी बात को स्वीकार नहीं करता।" उन्होंने कहा कि यदि युवा किसी मुद्दे पर विरोध जताते हैं तो वे देशद्रोही नहीं बन जाते, बल्कि वे हमारे ही परिवार और देश का हिस्सा हैं। यह नई पीढ़ी अपने विचारों और देशभक्ति के संदेशों को लेकर पहले से कहीं अधिक ईमानदार है।
नीट (NEET) छात्र आंदोलन पर लाठीचार्ज पर उठाए सवाल
हाल ही में नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों पर 20 जुलाई को हुए पुलिस लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर संघ प्रमुख ने गहरा दुख जताया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "युवा छात्रों पर लाठीचार्ज करने की नौबत क्यों आई? पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया? इसके पीछे के वास्तविक कारणों की गहराई से जांच होनी चाहिए।"
'शिक्षा व्यापार नहीं', बजट का 6 प्रतिशत आवंटित करने की मांग
देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों का समर्थन करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा को व्यापार का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारा दायित्व है और इसके लिए शिक्षण संस्थानों के शुल्क ढांचे (Fee Structure) का पुनर्निर्धारण आवश्यक है।" उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत देश के कुल बजट का कम से कम 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित करने की मांग का समर्थन किया।
शिक्षकों के प्रशिक्षण और समाज की भागीदारी पर जोर
संघ प्रमुख ने रेखांकित किया कि केवल सरकारी नीतियों या ढांचागत बदलावों से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा। उन्होंने शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण और स्कूलों के विकास में स्थानीय समाज व आम नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी को अनिवार्य बताया, ताकि जमीनी स्तर पर शिक्षा का स्तर सुधारा जा सके।
पाकिस्तान और चीन पर टिप्पणी: 'कोई भी हमेशा के लिए स्थायी दुश्मन नहीं'
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पाकिस्तान या चीन को हमेशा के लिए 'स्थायी शत्रु' मानना सही दृष्टिकोण नहीं है। उन्होंने कहा, "दो देशों के बीच संघर्ष के समय द्विपक्षीय संबंध अस्थायी रूप से स्थगित हो सकते हैं, लेकिन वे हमेशा के लिए समाप्त नहीं होते। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक राजनीति की भूमिका होती है।"
संकट के समय सरकार के साथ खड़े रहने का संदेश
विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय संकट या संघर्ष की स्थिति में देश की जनता को एकजुट होकर अपनी सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अंतिम विश्लेषण में मानवता ही सर्वोपरि है और वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत के तहत अंततः सभी इंसान एक ही हैं।