कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगर पालिका भर्ती भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हाथ एक बड़ा बयान लगा है। दक्षिण दमदम नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन पांचू राय ने इस घोटाले को लेकर पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बोस के खिलाफ बेहद विस्फोटक गवाही दी है। पांचू राय के मुताबिक, नगर पालिका में भर्तियों के लिए प्रमोटर अयन शील की बाहरी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने के वो सख्त खिलाफ थे। उन्होंने इस पर लिखित आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया था कि आखिर किसी बाहरी एजेंसी को यह काम क्यों दिया जा रहा है? लेकिन तत्कालीन वाइस चेयरमैन सुजीत बोस ने उनकी इस आपत्ति को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। इस बीच, ईडी की हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद गुरुवार को सुजीत बोस को दोबारा बिचार भवन (स्पेशल कोर्ट) में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जज ने सुजीत बोस को 4 जून तक जेल हिरासत (Judicial Custody) में भेजने का निर्देश दिया है।
वर्तमान चेयरमैन नितिन दत्त भी रडार पर, बीमारी का दिया हवाला
ईडी ने कोर्ट में बताया कि सुजीत बोस के बयानों की कड़ियों को जोड़ने के लिए दक्षिण दमदम नगर पालिका के मौजूदा चेयरमैन नितिन दत्त से पूछताछ बेहद जरूरी है। एजेंसी उन्हें दो बार समन जारी कर चुकी है, लेकिन दोनों ही बार उन्होंने मेडिकल सर्टिफिकेट (बीमारी का हवाला) जमा कर हाजिरी से दूरी बना ली। ईडी दोनों के बयानों का आमना-सामना (Cross Verification) कराना चाहती है।
150 उम्मीदवारों की अवैध भर्ती और 2 करोड़ का सीधा कनेक्शन
अदालत में ईडी के वकील ने सुजीत बोस की जमानत याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए। केंद्रीय एजेंसी ने सुजीत बोस पर इस घोटाले से सीधे तौर पर 2 करोड़ रुपये का गबन करने का आरोप लगाया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक: मुख्य आरोपी अयन शील के पास से जो डिजिटल दस्तावेज और डिवाइस बरामद हुए हैं, उनसे साफ पता चलता है कि दक्षिण दमदम नगर पालिका में करीब 150 उम्मीदवारों की अवैध भर्ती में सुजीत बोस का सीधा हाथ था। उस समय वह पालिका के वाइस चेयरमैन पद पर थे। भ्रष्टाचार की एक बड़ी रकम (लगभग 90 लाख रुपये) गोपाल चंद्र पोद्दार नाम के व्यक्ति के पास पहुंची। इस कंपनी में गोपाल और उत्तम साहा की 64% हिस्सेदारी थी।
जांच में असहयोग और गवाहों को प्रभावित करने का डर
ईडी के वकील ने कोर्ट को बताया कि पूर्व मंत्री जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहे हैं। जब उनसे उनके परिवार की बेहिसाब संपत्ति और आय के स्रोतों के बारे में पूछा जाता है, तो वह इसका ठीकरा दूसरों के सिर फोड़ने की कोशिश करते हैं। वकील ने दलील दी कि सुजीत बोस एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं, अगर उन्हें जमानत मिलती है तो वे सबूतों को नष्ट कर सकते हैं और गवाहों को डरा-धमका सकते हैं। दूसरी तरफ, सुजीत बोस के वकील ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' के तहत की गई गिरफ्तारी बताया और जमानत की अर्जी लगाई। हालांकि, अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी और आरोपी को 14 दिनों की जेल हिरासत में भेज दिया।