चंडीगढ़. देश में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उत्कृष्टता का परचम लहराया है। संस्थान के रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (ROTTO North) को लगातार तीसरे वर्ष ‘नेशनल बेस्ट ROTTO’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2019 के बाद यह चौथा अवसर है जब यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान पीजीआईएमईआर के खाते में आया है। लगातार 2023, 2024 और 2025 के प्रदर्शन के आधार पर मिली यह उपलब्धि न केवल संस्थान की कार्यकुशलता का प्रमाण है, बल्कि भारत में अंगदान की संस्कृति को विकसित करने के उसके सतत प्रयासों की भी राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सम्मान देशभर के चिकित्सा संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं और अंगदान के प्रति समाज में विश्वास को मजबूत करते हैं।
भारतीय अंगदान दिवस पर मिला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार
नई दिल्ली स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित 16वें भारतीय अंगदान दिवस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने पीजीआईएमईआर को यह सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) द्वारा किया गया। समारोह में देशभर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर अंगदान को जनआंदोलन का स्वरूप देने, मृतक अंगदान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने तथा प्रत्यारोपण प्रणाली को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर विशेष बल दिया गया। राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान इस दिशा में पीजीआईएमईआर के दीर्घकालिक योगदान की औपचारिक पहचान भी है।
विशेषज्ञों की समर्पित टीम ने रचा सफलता का नया इतिहास
पीजीआईएमईआर की ओर से संस्थान के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रहण किया। उनके साथ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर (डॉ.) अशोक कुमार, न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर धीरज खुराना, एनेस्थीसिया एवं इंटेंसिव केयर विभाग के प्रोफेसर हेमंत भगत, ROTTO North के नोडल अधिकारी डॉ. विजय ताड़िया तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी/मीडिया) की सलाहकार सरयू डी. मद्रा भी उपस्थित रहे। संस्थान के विशेषज्ञों ने इस उपलब्धि का श्रेय चिकित्सकों, ट्रांसप्लांट समन्वयकों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी विशेषज्ञों तथा उन परिवारों को दिया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अंगदान का निर्णय लेकर अनेक लोगों को नया जीवन प्रदान किया। चिकित्सा जगत में यह उपलब्धि टीमवर्क, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण मानी जा रही है।
नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में निभा रहा है महत्वपूर्ण दायित्व
वर्ष 2015 में पीजीआईएमईआर को ROTTO North की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके अंतर्गत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण गतिविधियों के समन्वय का दायित्व संस्थान निभा रहा है। इस क्षेत्रीय नेटवर्क के माध्यम से अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाता है, संभावित अंगदाताओं की पहचान की जाती है, प्रत्यारोपण प्रक्रिया को वैज्ञानिक ढंग से संचालित किया जाता है तथा विभिन्न राज्यों के बीच अंगों के पारदर्शी आवंटन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में इतनी प्रभावी प्रणाली का संचालन संस्थान की प्रशासनिक क्षमता और तकनीकी दक्षता को भी दर्शाता है।
जागरूकता, प्रशिक्षण और समन्वय बना सफलता का आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं ही अंगदान को सफल नहीं बना सकतीं, बल्कि समाज में जागरूकता और स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षित होना भी उतना ही आवश्यक है। पीजीआईएमईआर ने पिछले वर्षों में चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, ट्रांसप्लांट समन्वयकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसके साथ ही विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न राज्यों में जागरूकता अभियान चलाकर मृतक अंगदान के महत्व को लोगों तक पहुंचाया गया है। यही कारण है कि उत्तर भारत में अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है और अधिक से अधिक परिवार इस मानवीय पहल से जुड़ने लगे हैं। विशेषज्ञ इसे देश में स्वास्थ्य सेवा के मानवीय स्वरूप को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानते हैं।
अंगदान की नई संस्कृति गढ़ने की दिशा में प्रेरक उपलब्धि
भारत में आज भी हजारों मरीज हृदय, यकृत, गुर्दा, फेफड़े और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में रहते हैं। उपलब्ध अंगों की संख्या और जरूरत के बीच मौजूद बड़ा अंतर स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे समय में पीजीआईएमईआर और ROTTO North जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। लगातार तीसरी बार प्राप्त यह राष्ट्रीय सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस समर्पण, पारदर्शिता और उत्कृष्ट समन्वय की पहचान है जिसने देश में अंगदान की प्रक्रिया को नई गति दी है। यह उपलब्धि भविष्य में और अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगी तथा भारत को अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सशक्त और संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ाएगी।