नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा है कि 'विकसित भारत 2047' केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह देश को समृद्ध बनाने का एक ठोस संकल्प है। गुरुवार को राजधानी के 'सेवा तीर्थ' में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक मैराथन बैठक में प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जी-जान से जुटने का निर्देश दिया। करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन सुधार, प्रशासनिक दक्षता और देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों पर विस्तार से मंथन हुआ। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने इस बैठक को बेहद "उत्पादक और फलदायी" बताया। उन्होंने लिखा कि बैठक में मंत्रियों ने नागरिकों के "इज ऑफ लिविंग" (सहज जीवन) और "इज ऑफ डूइंग बिजनेस" (व्यापार में सुगमता) को बढ़ावा देने के लिए सुधारों की गति को तेज करने पर विचार साझा किए।
ईरान युद्ध के आर्थिक असर से आम जनता को बचाने पर मंथन
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में इस बात पर विशेष चिंता जताई कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर कोई सीधा बोझ न पड़े। पीएम ने संबंधित मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे वैश्विक संकट के कारण पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहें। इस संदर्भ में बैठक में ऊर्जा (जमीन और तेल), कृषि, उर्वरक, नागरिक उड्डयन (एविएशन), नौवहन (शिपिंग) और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और कीमतें नियंत्रित रहें।
तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले कामकाज की समीक्षा
माना जा रहा है कि यह इस साल की पहली ऐसी बैठक है जिसमें कैबिनेट मंत्रियों के साथ-साथ स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों और अन्य सभी राज्य मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया। कुछ ही दिनों बाद केंद्र की तीसरी एनडीए (NDA) सरकार के दो साल पूरे होने जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण वर्षगांठ से ठीक पहले हुई इस बैठक में सरकार के अब तक के कामकाज की व्यापक समीक्षा की गई और भविष्य का खाका तैयार किया गया। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे लोक कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल और प्रभावी बनाएं, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की नीतियां आसानी से पहुंच सकें।