नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गुरुवार को फिनटेक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए डेटा की सुरक्षा और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि फिनटेक कंपनियों के पास मौजूद वित्तीय और गैर-वित्तीय जानकारी बेहद मूल्यवान है और इसे केवल कारोबारी संपत्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मल्होत्रा ने कंपनियों से आग्रह किया कि वे ग्राहकों के डेटा को ‘न्यासी जिम्मेदारी’ के रूप में लें। उनका कहना था कि किसी भी फिनटेक कंपनी के पास मौजूद यह जानकारी पूंजी से भी अधिक मूल्यवान हो सकती है, क्योंकि इसमें वास्तविक लोगों की वित्तीय और गैर-वित्तीय सूचनाएं शामिल होती हैं।
पूंजी से भी ज्यादा कीमती है ग्राहकों का डेटा
फिनटेक कंपनियां भुगतान, ऋण, निवेश और दूसरी डिजिटल वित्तीय सेवाओं के जरिए बड़ी मात्रा में ग्राहक संबंधी जानकारी जुटाती हैं। इसमें वित्तीय लेनदेन से जुड़ी सूचनाओं के साथ-साथ ऐसी गैर-वित्तीय जानकारी भी शामिल हो सकती है, जिसका गलत इस्तेमाल ग्राहक की निजता और वित्तीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
आरबीआई गवर्नर का संदेश इसी बढ़ती डेटा-आधारित अर्थव्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। कंपनियों को यह समझना होगा कि ग्राहक द्वारा साझा की गई जानकारी केवल कमाई का माध्यम नहीं है। उसके सुरक्षित इस्तेमाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
नियमों की कमियों का फायदा उठाने से बचें
संजय मल्होत्रा ने फिनटेक कंपनियों को नियामकीय व्यवस्था में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर कारोबार खड़ा करने से भी सावधान किया। उन्होंने ऐसी रणनीति की आलोचना की, जिसमें कंपनी पहले तेजी से विस्तार करती है और बाद में नियमों या नियामक से स्थिति स्पष्ट कराने की कोशिश करती है।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, ‘पहले कारोबार बढ़ाओ और बाद में स्पष्टीकरण या माफी मांगो’ वाला तरीका उचित नहीं है। उनका संदेश स्पष्ट है कि फिनटेक कंपनियों को नवाचार और विकास के साथ नियामकीय जिम्मेदारियों को भी शुरुआत से ही कारोबार का हिस्सा बनाना चाहिए।
तेजी से बढ़ते फिनटेक क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती
डिजिटल भुगतान और वित्तीय तकनीक के विस्तार ने देश में वित्तीय सेवाओं को तेजी से बदल दिया है। नई कंपनियां तकनीक के जरिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को अधिक आसान और सुलभ बनाने की कोशिश कर रही हैं। इस विकास के साथ ग्राहकों के डेटा की मात्रा और उसका व्यावसायिक महत्व भी बढ़ा है।
ऐसे माहौल में नियामक के लिए नवाचार को बढ़ावा देने और उपभोक्ता हितों की रक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। आरबीआई का जोर इस बात पर है कि तकनीकी प्रगति ग्राहकों के भरोसे और सुरक्षा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
ग्राहक का भरोसा ही फिनटेक की असली ताकत
फिनटेक कंपनियों के कारोबार का बड़ा आधार डिजिटल भरोसा है। ग्राहक अपनी वित्तीय जानकारी किसी कंपनी को तभी सौंपता है जब उसे उम्मीद होती है कि उसका डेटा सुरक्षित रहेगा और उसका इस्तेमाल उचित तरीके से किया जाएगा। डेटा की सुरक्षा में चूक होने पर कंपनी की प्रतिष्ठा के साथ पूरे डिजिटल वित्तीय तंत्र पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
इसीलिए डेटा संरक्षण को केवल तकनीकी या कानूनी अनुपालन का विषय मानना पर्याप्त नहीं है। कंपनियों को अपनी कारोबारी संस्कृति में डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देनी होगी। आरबीआई गवर्नर की टिप्पणी इसी व्यापक भरोसे को मजबूत करने की दिशा में संकेत देती है।
नवाचार जरूरी, लेकिन जिम्मेदारी के साथ
फिनटेक क्षेत्र की सफलता के लिए नवाचार और तेज विस्तार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके साथ नियामकीय स्पष्टता और ग्राहक हितों का ध्यान रखना भी जरूरी है। कंपनियों द्वारा नए उत्पाद और सेवाएं विकसित करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका मॉडल मौजूदा नियमों और उपभोक्ता संरक्षण की भावना के अनुरूप हो।
आरबीआई की ओर से दिया गया यह संदेश ऐसे समय में आया है जब डिजिटल वित्तीय सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में डेटा का महत्व और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में ग्राहकों की जानकारी को सुरक्षित रखना केवल अनुपालन की शर्त नहीं, बल्कि फिनटेक कंपनियों के लिए दीर्घकालिक भरोसा कायम रखने की बुनियादी जिम्मेदारी भी होगी।