कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की पीड़िता 'अभया' को न्याय दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादे को निभाते हुए, नई भाजपा सरकार ने इस मामले की फाइल दोबारा खोल दी है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने न केवल तीन वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों को निलंबित किया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि जांच की आंच पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों तक भी पहुँच सकती है।
"किसके निर्देश पर काम कर रही थी पुलिस?" — मुख्यमंत्री
नवान्न में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि दो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें चुप रहने के लिए पैसे देने की पेशकश की थी। मुख्यमंत्री ने कहा:
"यह जांचना जरूरी है कि वे अधिकारी किसके निर्देश पर परिवार को रिश्वत दे रहे थे? क्या यह तत्कालीन मुख्यमंत्री का आदेश था या किसी अन्य मंत्री का? जब तक आरोपित अधिकारियों को पद से नहीं हटाया जाता, जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। इसीलिए विनीत गोयल, इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता को सस्पेंड कर जांच शुरू की गई है।"
भावुक हुईं अभया की माँ, मोदी-शुभेंदु का जताया आभार
अपनी बेटी के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ते हुए भाजपा में शामिल हुईं और अब पानीहाटी से नवनिर्वाचित विधायक रतना देबनाथ (अभया की माँ) ने इस कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा:
"मैं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को धन्यवाद देती हूँ। यही निर्णय पिछली मुख्यमंत्री भी ले सकती थीं, लेकिन उन्होंने अपराधियों को बचाया। यही दो मुख्यमंत्रियों के बीच का अंतर है। मैं मोदी जी को प्रणाम करती हूँ। यह न्याय की प्रक्रिया शुरू होने का पहला कदम है। मुझे विश्वास है कि अब और भी कई लोग गिरफ्तार होंगे।"
पीड़िता के पिता शेखर देबनाथ ने भी कहा कि अपराधियों को छिपाने की कोशिश करने वाले कानून के रखवालों के लिए यह एक कड़ा सबक है। मुख्यमंत्री ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जिससे भविष्य में कोई अधिकारी अपराध को दबाने की हिम्मत नहीं करेगा।
आंदोलनकारी डॉक्टरों में भी जगी उम्मीद
आरजी कर आंदोलन का चेहरा रहे डॉक्टर अनिकेत महतो ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार अगर चाहे तो सब कुछ कर सकती है। अब सच सामने आने के रास्ते में कोई बाधा नहीं बची है।"राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही इस संवेदनशील मामले पर प्रहार कर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चलेगी। पूरे बंगाल की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच में और कौन से सफेदपोश चेहरे बेनकाब होते हैं।