ग्रामीण भारत में स्वच्छ ईंधन के रूप में LPG की पहुंच पिछले वर्षों में बढ़ी है, लेकिन कनेक्शन मिलने और लगातार इस्तेमाल करने के बीच अभी भी बड़ा अंतर दिखाई देता है। CEEW की स्टडी के अनुसार, पिछले 90 दिनों में करीब 73% ग्रामीण परिवारों ने LPG का इस्तेमाल किया, लेकिन केवल 23% परिवार ही खाना पकाने के लिए पूरी तरह LPG पर निर्भर पाए गए। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में परिवार LPG के साथ लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधन का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी अब भी खाना पकाने का प्रमुख ईंधन बनी हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि केवल कनेक्शन उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित रिफिल, उचित कीमत और आसान उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
घर तक सिलेंडर पहुंचने की व्यवस्था कमजोर
ग्रामीण परिवारों के सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्याओं में सिलेंडर की घर तक डिलीवरी भी शामिल है। अध्ययन के मुताबिक, LPG इस्तेमाल करने वाले ग्रामीण परिवारों में केवल 47% परिवारों को सिलेंडर की घर पर डिलीवरी मिलती है, जबकि बाकी परिवारों को स्वयं जाकर सिलेंडर लाना पड़ता है। दूरदराज के गांवों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि वितरक केंद्र तक पहुंचने में समय और अतिरिक्त परिवहन खर्च दोनों लगते हैं। कई परिवारों के लिए सिलेंडर की वास्तविक कीमत केवल रिफिल की कीमत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसे घर तक लाने की लागत भी कुल खर्च बढ़ा देती है। यही कारण है कि नियमित LPG इस्तेमाल की राह में अंतिम चरण की आपूर्ति व्यवस्था एक महत्वपूर्ण बाधा बनकर सामने आई है।
महंगी रिफिल से दोबारा लकड़ी की ओर लौटते परिवार
LPG को अपनाने के बावजूद ग्रामीण परिवारों का एक बड़ा वर्ग इसकी नियमित रिफिल कराने में आर्थिक दबाव महसूस करता है। सर्वेक्षण में शामिल कम से कम 80% लोगों ने कहा कि यदि 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर 400 रुपये में उपलब्ध हो, तो वे खाना पकाने के लिए पूरी तरह LPG पर निर्भर होना शुरू कर देंगे। वहीं, औसत भुगतान क्षमता करीब 500 रुपये प्रति सिलेंडर सामने आई है, जो मौजूदा सब्सिडी वाले प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सिलेंडर की करीब 642 रुपये कीमत से कम है। ऐसे में कई परिवार LPG को केवल जरूरत के समय इस्तेमाल करते हैं और बाकी दिनों में लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन पर लौट जाते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि नियमित रिफिल की वहनीयता स्वच्छ ईंधन की निरंतरता के लिए सबसे निर्णायक कारकों में से एक है।
गांवों में अनौपचारिक बिक्री भी बढ़ा रही परेशानी
जहां औपचारिक कनेक्शन और वितरण व्यवस्था पर्याप्त मजबूत नहीं है, वहां LPG पाने के लिए ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर होना पड़ सकता है। CEEW के अध्ययन के अनुसार, ऐसे इलाकों में कुछ उपभोक्ता स्थानीय दुकानों, सड़क किनारे विक्रेताओं या अनधिकृत विक्रेताओं से LPG हासिल करते हैं। इस व्यवस्था में उन्हें सामान्य कीमत की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्वच्छ ईंधन का नियमित इस्तेमाल और कठिन हो जाता है। साथ ही, औपचारिक वितरण व्यवस्था से बाहर खरीदारी करने की मजबूरी उपभोक्ता सुरक्षा और आपूर्ति की विश्वसनीयता से जुड़े सवाल भी पैदा करती है। इसलिए ग्रामीण LPG नीति में कनेक्शन के साथ मजबूत और सुलभ वितरण तंत्र पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
प्रवासी मजदूरों के लिए समस्या और गहरी
LPG की पहुंच से जुड़ी चुनौतियां ग्रामीण प्रवासी मजदूरों के मामले में और अधिक जटिल दिखाई देती हैं। अध्ययन में पाया गया कि 79% प्रवासी LPG उपयोगकर्ताओं के पास औपचारिक कनेक्शन नहीं है, जबकि 4% से भी कम प्रवासी LPG उपयोगकर्ता प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े हैं। यह स्थिति बताती है कि रोजगार के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले परिवारों के लिए मौजूदा कनेक्शन व्यवस्था हमेशा अनुकूल नहीं हो पाती। वर्ष 2021 में प्रवासियों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने के उद्देश्य से स्वघोषणा की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रवासी इस योजना से जुड़ नहीं सके। प्रवासी परिवारों के लिए स्थानांतरण के दौरान कनेक्शन और रिफिल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करना स्वच्छ ईंधन नीति की महत्वपूर्ण अगली चुनौती बन सकता है।
सिर्फ कनेक्शन नहीं, नियमित इस्तेमाल पर जोर जरूरी
CEEW के फेलो और अध्ययन के सह-लेखक अभिषेक कर के अनुसार, अब नीति का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने नए LPG कनेक्शन जारी किए गए हैं। असली सवाल यह है कि कनेक्शन पाने के बाद परिवार कितनी नियमितता से LPG की रिफिल करा पा रहे हैं और क्या वे पूरी तरह स्वच्छ ईंधन पर निर्भर हो पा रहे हैं। इसी आधार पर CEEW ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी में करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी का सुझाव दिया है। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों को योजना से जोड़ने के लिए विशेष अभियान और ग्रामीण क्षेत्रों में घर तक सिलेंडर पहुंचाने वाले वितरकों के लिए अलग प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई है। इन कदमों का उद्देश्य LPG को केवल उपलब्ध विकल्प नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित और व्यावहारिक ईंधन बनाना है।
स्वच्छ ईंधन की मंजिल में कीमत और सुविधा दोनों अहम
ग्रामीण भारत में LPG के व्यापक और स्थायी इस्तेमाल की कहानी केवल सरकारी कनेक्शनों की संख्या से तय नहीं होगी। परिवार तभी पूरी तरह LPG पर निर्भर होंगे, जब रिफिल उनकी आय के अनुरूप हो, सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हो और उसे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भरोसेमंद हो। CEEW की सिफारिशें इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत करती हैं, जिसमें आर्थिक सहायता के साथ वितरण तंत्र को मजबूत करना भी जरूरी है। यदि रिफिल की कीमत कम करने, अंतिम चरण की डिलीवरी बेहतर करने और प्रवासी परिवारों के लिए कनेक्शन प्रक्रिया सरल बनाने पर एक साथ काम किया जाता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन का नियमित इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे पारंपरिक ठोस ईंधनों पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ रसोई की दिशा में आगे बढ़ने में भी मदद मिलेगी।