उत्तर 24 परगना के बसिरहाट महकमा अंतर्गत सवरूपनगर ब्लॉक का बिलबल्ली क्षेत्र इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भारत–बांग्लादेश सीमा से सटे इस इलाके में लगातार जलभराव ने किसानों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है।
विशाल कृषि और मत्स्य क्षेत्र पर संकट का साया
बिलबल्ली क्षेत्र लगभग 52 हजार एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसमें करीब 10 हजार एकड़ जलाशय और 42 हजार एकड़ कृषि भूमि शामिल है। यहां धान, जूट, तिल और सरसों की खेती के साथ बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन भी किया जाता है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
सोनाई नदी के बदलते प्रवाह से बढ़ी समस्या
स्थानीय लोगों के अनुसार सोनाई नदी का बदलता प्रवाह और कमजोर जल निकासी व्यवस्था इस संकट की मुख्य वजह है। नदी का पानी खेतों में फैलकर हर साल नुकसान करता है, लेकिन इस बार स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
बांकड़ा, कैजुरी और बालती में सबसे ज्यादा नुकसान
बांकड़ा, कैजुरी और बालती ग्राम पंचायतों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। हजारों बीघा खेत जलमग्न हो चुके हैं और धान व तिल जैसी फसलें पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
गर्मी में भी खेतों में पानी, किसानों की चिंता बढ़ी
चैत्र–वैशाख की तेज गर्मी के बावजूद खेतों में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। इस असामान्य स्थिति ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सोनाई नदी के प्रवाह और तेतुलिया स्लुइस गेट की व्यवस्था की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। साथ ही स्थायी समाधान निकालकर हर साल होने वाले नुकसान को रोका जाए और किसानों को मुआवजा दिया जाए।