कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर नाराजगी के स्वर उभरने लगे हैं। दिल्ली में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने की कवायद में जुटी ममता बनर्जी ने गुरुवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी सांसदों की एक अहम बैठक की। इस बैठक में ममता ने एक बार फिर अपने पुराने सिपहसालार कल्याण बनर्जी पर भरोसा जताते हुए उन्हें लोकसभा में पार्टी का 'मुख्य सचेतक' (Chief Whip) नियुक्त किया है। लेकिन इस फैसले के बाद पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तीदार के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बगावत के संकेत दे दिए हैं।
सोशल मीडिया पर काकली का 'बम', कहा– "4 दशक की वफादारी का इनाम मिला"
शुक्रवार को बारासात से सांसद काकली घोष दस्तीदार ने फेसबुक पर महज एक लाइन लिखकर टीएमसी के भीतर जारी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया। उन्होंने लिखा:
'76 से परिचय, 84 से साथ चलना शुरू। 4 दशकों की वफादारी के लिए आज मुझे पुरस्कृत किया गया।'
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि काकली ने इस एक लाइन के जरिए ममता बनर्जी को अपनी लंबी सेवा और वफादारी की याद दिलाई है। गौरतलब है कि अगस्त 2025 में कल्याण बनर्जी ने अन्य सांसदों से विवाद के चलते पद छोड़ दिया था, जिसके बाद काकली को यह जिम्मेदारी मिली थी। अब कल्याण की वापसी का मतलब काकली को पद से हटाना है, जो उन्हें नागवार गुजरा है।
कालीघाट की बैठक में ममता का दर्द: "भवानीपुर में मुझ पर हुआ हमला"
सांसदों के साथ बैठक में ममता बनर्जी काफी आक्रामक नजर आईं। उन्होंने चुनावी हार और मतगणना के दिन हुए अनुभवों को साझा करते हुए कहा:
"बीजेपी ने कोर्ट से लेकर मतगणना केंद्र तक घेराबंदी की थी। मतगणना के दिन भवानीपुर में उनके काउंटिंग एजेंट ने मुझ पर हमला किया। देश में 'सुपर इमरजेंसी' जैसे हालात हैं, लेकिन 2029 (लोकसभा चुनाव) में उनकी हार निश्चित है।"
बैठक के दौरान कल्याण बनर्जी ने भी मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि वे दिल्ली में पार्टी की आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने अदालती लड़ाई का जिक्र करते हुए बीजेपी वकीलों पर नारेबाजी करने का आरोप लगाया।
क्यों बदला गया फैसला? हार के बाद 'लड़ाकू' चेहरे की तलाश
2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी को दिल्ली में एक ऐसे चेहरे की जरूरत है जो आक्रामक तरीके से केंद्र और बीजेपी का मुकाबला कर सके। 2025 में काकली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक और शताब्दी रॉय को उप-नेता बनाया गया था, लेकिन मौजूदा 'विनाशकारी' चुनावी नतीजों के बाद ममता ने फिर से 'लड़ाकू' नेता माने जाने वाले कल्याण बनर्जी पर दांव खेला है।
सवाल अब यह है: सत्ता जाने के बाद क्या ममता बनर्जी अपने पुराने साथियों को एकजुट रख पाएंगी? काकली घोष दस्तीदार का यह 'बेसुरा' होना बंगाल की राजनीति में किसी नए उलटफेर का संकेत तो नहीं?