नई दिल्ली. देशभर में एक बार फिर आवश्यक सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। टमाटर, प्याज और आलू जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के दाम बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित होने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की परिस्थितियां सामान्य नहीं रहीं और आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले सप्ताहों में खाद्य महंगाई (फूड इंफ्लेशन) में और तेजी देखने को मिल सकती है। इसका असर विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अधिक पड़ने की आशंका है।
सरकारी आंकड़ों में दिखी कीमतों की तेज़ बढ़ोतरी
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले एक महीने में टमाटर की औसत खुदरा कीमत में लगभग 18 प्रतिशत, प्याज में 11 प्रतिशत और आलू में 1.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, पिछले वर्ष की तुलना में टमाटर के दाम करीब 25 प्रतिशत और प्याज के दाम 3.3 प्रतिशत अधिक हो चुके हैं। हालांकि आलू की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी यह संकेत दे रही है कि बाजार में दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
दिल्ली समेत कई राज्यों में टमाटर के दाम ने पकड़ी रफ्तार
भीषण गर्मी और उत्पादन क्षेत्रों से कम आपूर्ति का सबसे अधिक असर टमाटर की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में टमाटर के दाम लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान अधिक रहने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और परिवहन के दौरान भी नुकसान बढ़ा है, जिससे खुदरा बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं।
मौसम और मानसून ने बढ़ाई किसानों व बाजार की मुश्किलें
बेमौसम बारिश, लंबे समय तक बनी भीषण गर्मी और मानसून के धीमे विस्तार ने सब्जियों की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। विशेष रूप से टमाटर जैसी संवेदनशील फसलें उच्च तापमान और अनियमित वर्षा से अधिक प्रभावित हुई हैं। वहीं प्याज की फसल के भंडारण पर भी प्रतिकूल मौसम का असर पड़ा है, जिससे कई राज्यों में इसकी कीमतें 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियों ने भी उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है।
सप्लाई चेन पर दबाव से बढ़ी बाजार की चिंता
राजस्थान और हरियाणा जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से दिल्ली सहित अन्य महानगरों में टमाटर की आवक प्रभावित हुई है। गर्म मौसम के कारण परिवहन के दौरान खराब होने वाली उपज की मात्रा भी बढ़ी है, जिससे थोक बाजारों में उपलब्धता कम हुई और खुदरा कीमतों में तेजी आ गई। व्यापारियों का कहना है कि जब तक नई फसल पर्याप्त मात्रा में बाजार में नहीं आती, तब तक कीमतों में स्थिरता आने की संभावना कम दिखाई देती है।
महंगाई पर पड़ सकता है व्यापक असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि सब्जियों की कीमतों में यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सीधा प्रभाव देश की खुदरा महंगाई दर और खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। मानसून की प्रगति, आगामी फसल की स्थिति और आपूर्ति व्यवस्था आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करेगी। यदि वर्षा सामान्य रहती है और उत्पादन बेहतर होता है तो बाजार में राहत मिल सकती है, लेकिन प्रतिकूल मौसम की स्थिति बनी रहने पर उपभोक्ताओं को रसोई का बजट और अधिक बढ़ाना पड़ सकता है।