भगोड़े शराब कारोबारी और 'किंगफिशर एयरलाइंस' के पूर्व मालिक विजय माल्या ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वे निकट भविष्य में भारत नहीं लौटेंगे। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक के बाद एक कई पोस्ट शेयर करते हुए माल्या ने खुद को 'भगोड़ा' या 'ऋणदाता/डिफॉल्टर' कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। माल्या का दावा है कि भारतीय प्रवर्तन एजेंसियों ने उनके कुल बकाया कर्ज की तुलना में कहीं अधिक धनराशि उनकी संपत्तियों को बेचकर वसूल कर ली है, फिर भी उनके खिलाफ अन्यायपूर्ण कार्रवाई की जा रही है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल ईडी के हलफनामे का दिया हवाला
अपने दावों को साबित करने के लिए विजय माल्या ने सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज साझा किया है, जिसे उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा बताया है। माल्या के अनुसार, इस हलफनामे में दर्शाया गया है कि किंगफिशर एयरलाइंस पर 6,203 करोड़ रुपये का मूल कर्ज था, जिसके एवज में 2 अगस्त 2021 तक बैंकों के कंसोर्टियम को 14,131.60 करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियां सौंपी जा चुकी हैं। माल्या का कहना है कि जब कर्ज की रकम से दोगुनी से अधिक वसूली हो चुकी है, तो उन्हें 'भगोड़ा' क्यों कहा जा रहा है।
'भारत सरकार ने मुझे भ्रष्टाचार का पोस्टर बॉय बनाया'
सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए विजय माल्या ने आरोप लगाया कि भारत सरकार की कार्रवाइयों की वजह से उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने लिखा कि सरकार ने उन्हें भ्रष्टाचार का 'पोस्टर बॉय' बना दिया है। माल्या ने कहा, "जो लोग मुझे भगोड़ा कहते हैं और भारत न लौटने का ताना देते हैं, वे जान लें कि मैं 1992 से ब्रिटेन का स्थायी निवासी हूं और फिलहाल कानूनी कारणों से मुझे ब्रिटेन छोड़ने की अनुमति नहीं है"।

17 बैंकों के 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज का मामला
उल्लेखनीय है कि किंगफिशर एयरलाइंस को चलाने के लिए विजय माल्या ने 17 भारतीय बैंकों के समूह से लगभग 9,000 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। कर्ज चुकाने में नाकाम रहने के बाद माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद भारतीय अधिकारियों के अनुरोध पर अप्रैल 2017 में लंदन में स्कॉटलैंड यार्ड ने उन्हें गिरफ्तार किया था, हालांकि तीन घंटे के भीतर ही उन्हें जमानत मिल गई थी। भारत सरकार लगातार माल्या के प्रत्यर्पण की कानूनी लड़ाई लड़ रही है।
प्रत्यर्पण की कोशिशों पर माल्या का रुख
भारत में अदालतों के सामने पेश होने के सवाल पर माल्या का तर्क है कि यूके की एक कानूनी प्रक्रिया के चलते वे देश से बाहर नहीं जा सकते। माल्या के इस ताजा रुख से साफ हो गया है कि भारतीय एजेंसियों द्वारा ब्रिटेन से उनके प्रत्यर्पण के लिए की जा रही कोशिशों को वे कानूनी आधार पर चुनौती देते रहेंगे और भारत वापस नहीं आएंगे।