नई दिल्ली. भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 12 सितंबर को देश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। दिल्ली-एनसीआर के लिए 12 सितंबर को कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है।
उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिमी भारत तथा पूर्वोत्तर तक मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि सभी राज्यों में बारिश की तीव्रता एक जैसी नहीं होगी। इसलिए किसी पूरे राज्य के लिए ‘मूसलाधार बारिश’ का एक समान अनुमान लगाने के बजाय स्थानीय पूर्वानुमान को प्राथमिकता देना जरूरी है।
उत्तर भारत में बारिश के साथ गरज-चमक
उत्तराखंड में 12 सितंबर को गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान दर्ज किया गया है। देहरादून के लिए भी IMD के स्थानीय पूर्वानुमान में 12 सितंबर को गरज-चमक और मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
वहीं लखनऊ और पूर्वी चंपारण जैसे क्षेत्रों के स्थानीय पूर्वानुमान में 12 सितंबर को अलग-अलग परिस्थितियां दिखाई गई हैं। लखनऊ में उस दिन कोई विशेष चेतावनी नहीं है, जबकि पूर्वी चंपारण में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। इससे स्पष्ट है कि एक ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर अलग हो सकता है।
मध्य भारत में तेज बारिश का दौर
मध्य भारत के कुछ हिस्सों में 12 सितंबर को बारिश की गतिविधि तेज रह सकती है। महाराष्ट्र के वर्धा के लिए IMD ने 12 सितंबर को भारी बारिश और बिजली चमकने के साथ गरज-चमक की चेतावनी दर्ज की है। वहां 30-40 किमी/घंटे की तेज हवाओं की स्थिति भी स्थानीय पूर्वानुमान में दर्ज है।
गुजरात के अमरेली में भी 12 सितंबर को गरज-चमक और 30-40 किमी/घंटे की झोंकेदार हवाओं की संभावना बताई गई है। वहीं सूरत के लिए 12 सितंबर को गरज-चमक के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इससे पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम के सक्रिय रहने के संकेत मिलते हैं।
बिहार में बिजली और आंधी का खतरा
बिहार के कुछ हिस्सों में भी 12 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। पटना के स्थानीय पूर्वानुमान में उस दिन आंधी-तूफान के साथ बिजली चमकने की संभावना दर्ज की गई है। पूर्णिया के लिए भी गरज-चमक और 30-40 किमी/घंटे की झोंकेदार हवाओं का अनुमान है।
बारिश के दौरान बिजली गिरने का खतरा विशेष रूप से खुले इलाकों में बढ़ जाता है। ऐसे में किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम खराब होने पर खेत, पेड़ या खुले स्थान में रुकने से बचना चाहिए और सुरक्षित पक्के स्थान का सहारा लेना चाहिए।
85 किमी/घंटे की हवा वाले दावे पर जरूरी बात
ताजा उपलब्ध IMD आंकड़ों की जांच करने पर 12 सितंबर के लिए सभी 24 राज्यों में 80-85 किमी/घंटे की हवाओं की एक समान चेतावनी की पुष्टि नहीं होती। अलग-अलग स्थानों के लिए 30-40 किमी/घंटे या गरज-चमक के साथ तेज हवाओं जैसे स्थानीय पूर्वानुमान दर्ज हैं।
इसलिए 85 किमी/घंटे की हवा को पूरे देश या सभी 24 राज्यों पर लागू होने वाली चेतावनी के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। मौसम की वास्तविक तीव्रता स्थान और समय के अनुसार बदल सकती है। IMD की जिला और उपखंड स्तर की चेतावनियों को सबसे विश्वसनीय आधार माना जाना चाहिए।
किसानों के लिए मौसम को लेकर सावधानी जरूरी
बारिश और तेज हवाओं के दौरान किसानों को खेतों में खुले स्थान पर काम करने से बचना चाहिए, खासकर जब गरज-चमक शुरू हो जाए। कटी हुई फसल, कृषि उपकरण और अन्य हल्की सामग्री को तेज हवा और बारिश से सुरक्षित रखने की तैयारी पहले से करना उपयोगी रहेगा।
फसलों पर मौसम का असर स्थानीय वर्षा की मात्रा और हवा की तीव्रता पर निर्भर करेगा। इसलिए किसानों के लिए अपने जिले का स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखते रहना ज्यादा उपयोगी होगा। IMD की ताजा जानकारी में भी अलग-अलग जिलों और शहरों के लिए मौसम की स्थिति में काफी अंतर दिखाई दे रहा है।
पहाड़ी इलाकों में विशेष सतर्कता की जरूरत
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन और अचानक जलभराव जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। उत्तराखंड में 12 सितंबर को मध्यम से भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी को देखते हुए संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान लगातार अपडेट होते रहते हैं। इसलिए 12 सितंबर को यात्रा करने वाले लोगों के लिए रवाना होने से पहले अपने मार्ग और गंतव्य का स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखना बेहतर होगा। विशेषकर पहाड़ी और भारी बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।