कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद अब विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट और विवाद चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को विधानसभा में विपक्षी दल के रूप में आधिकारिक मान्यता देने और उनके विधायकों के लिए कमरा (ऑफिस) आवंटित करने की मांग को लेकर बुधवार को विधानसभा परिसर में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।
पार्टी के रुख और मांगों को लेकर नवनिर्वाचित विरोधी दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय (Shovandeb Chattopadhyay) और बेलेघाट के विधायक कुणाल घोष (Kunal Ghosh) विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथींद्रनाथ बसु से मुलाकात करने पहुंचे थे। लेकिन स्पीकर द्वारा मुलाकात न किए जाने से नाराज दोनों टीएमसी नेता उनके कमरे के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
"कमरे में होने के बावजूद स्पीकर ने नहीं की मुलाकात"
इस घटना को लेकर विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर राज्य की नई भाजपा सरकार और स्पीकर पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे 'चर्म असौजन्य' (घोर अशिष्टता) करार देते हुए कहा:
टीएमसी नेताओं का आरोप:
"हम अपनी निश्चित मांगों, शिकायतों और बयानों को लेकर माननीय स्पीकर से मिलने गए थे। स्पीकर अपने कमरे के भीतर ही बैठे हुए थे, इसके बावजूद उन्होंने हमसे मुलाकात नहीं की। इसके विरोध में विधानसभा के सबसे वरिष्ठतम विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय उनके कमरे के ठीक बाहर धरने पर बैठ गए हैं और मैं भी उनके साथ हूं।"
टीएमसी ने उठाए ये 3 मुख्य सवाल
धरने पर बैठे नेताओं ने वर्तमान विधानसभा प्रबंधन और स्पीकर पर राजनीतिक रूप से पक्षपात करने का आरोप लगाया है। कुणाल घोष के मुताबिक उनके मुख्य सवाल और मांगें निम्नलिखित हैं:
1. विपक्षी दल के नेता की मान्यता: शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विरोधी दल के नेता के रूप में आधिकारिक मान्यता का पत्र (Letter of Recognition) अभी तक क्यों जारी नहीं किया गया है?
2. कार्यालय का आवंटन: विधानसभा भवन के भीतर विरोधी दल के नेता और विपक्षी विधायकों के लिए कमरा क्यों आवंटित नहीं किया जा रहा है? कमरा न होने के कारण विपक्षी दल विधानसभा भवन में अपनी संसदीय दल (Legislative Party) की बैठक तक नहीं बुला पा रहा है।
3. दोहरा मापदंड: विधानसभा में स्पीकर और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कमरे पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन विपक्षी दल के नेता के कमरे का काम अब तक अधूरा क्यों है? इसमें और कितनी देरी होगी?
स्पीकर ने पहले कहा था— 'हम सुंदर कमरा तैयार कर रहे हैं'
इस पूरे विवाद पर विधानसभा अध्यक्ष रथींद्रनाथ बसु का पिछला बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा था, "हम विपक्षी दल के लिए कमरों को सुंदर तरीके से सजाकर और व्यवस्थित करके उनके हवाले करेंगे। इस प्रक्रिया में फिलहाल कुछ दिनों की देरी हो सकती है, लेकिन उन्हें बहुत अच्छे कमरे दिए जाएंगे। जब हम विपक्ष में थे, तब हमें जो कमरे मिले थे, वे ठीक नहीं थे जिससे काम करने में दिक्कत होती थी। हम कोशिश कर रहे हैं कि जो समस्याएं हमें विपक्ष में रहते हुए झेलनी पड़ी थीं, वो असुविधाएं उन्हें न हों।"
हालांकि, टीएमसी नेताओं ने स्पीकर के इस तर्क को खारिज कर दिया है। कुणाल घोष ने कहा कि स्पीकर के पास शोभनदेव बाबू के सवालों का कोई जवाब नहीं है, इसलिए वे मुंह छिपा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक विरोधी दल के नेता वहां धरने पर बैठे रहेंगे, तब तक बीजेपी की 'असौजन्य की राजनीति' का मुखौटा पूरी दुनिया के सामने बेनकाब होता रहेगा। कमरा तो उन्हें आज नहीं तो कल देना ही पड़ेगा।