हिंदू धर्म में ऋतु परिवर्तन का प्रतीक माना जाने वाला पावन पर्व वसंत पंचमी आज देशभर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व महाकवि कालिदास, विद्वानों, संगीतकारों और कलाकारों की आराध्य देवी मां सरस्वती को समर्पित है। वसंत पंचमी को ज्ञान, शिक्षा, संगीत और कला की देवी के प्राकट्य दिवस के रूप में भी जाना जाता है। बसंत पंचमी हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी को रात 02:28 बजे से हो रही है, जो 24 जनवरी 2026 को रात 01:46 बजे तक रहेगी।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
वसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत व्यापक है। यह पर्व न केवल वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है, बल्कि ज्ञान, बुद्धि, स्मरण शक्ति और रचनात्मकता की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना का विशेष दिन भी है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की उपासना करने से विद्या, विवेक और कला कौशल में वृद्धि होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सरस्वती शास्त्र, विज्ञान, संगीत, साहित्य, भाषा और कला की प्रेरणास्रोत हैं। इस कारण विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, संगीतकार और कलाकार इस दिन विशेष रूप से पूजा-अर्चना और मंत्र जाप करते हैं।
वसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, प्रातः काल का समय सरस्वती पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
शुभ पूजा मुहूर्त:
सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
इस अवधि में की गई पूजा विद्या, लेखन, संगीत और कला के क्षेत्र में विशेष सफलता प्रदान करने वाली मानी जाती है।
मां सरस्वती की पूजा विधि
- स्नान और शुद्धि: प्रातः स्नान कर पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- पीले वस्त्र धारण करें: पीला रंग बसंत ऋतु और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
- मूर्ति या चित्र स्थापना: पूजा स्थल पर मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- दीप प्रज्वलन: घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- फूल और भोग अर्पित करें: पीले फूल, अक्षत, रोली, हल्दी तथा केसर भात या बूंदी के लड्डू अर्पित करें।
- पुस्तक और वाद्य यंत्र रखें: पुस्तकों, कॉपियों और संगीत वाद्य यंत्रों को देवी के समीप रखकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
सरस्वती मंत्र
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है—
“या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
मान्यता है कि वसंत पंचमी के दिन शांत मन से इस मंत्र का 108 बार जाप करने से स्मरण शक्ति तीव्र होती है, वाणी में मधुरता आती है और अध्ययन में एकाग्रता बढ़ती है। यह मंत्र विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों और कलाकारों के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है।
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