मध्य प्रदेश स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुई बाघों की मौतों ने वन्यजीव संरक्षण तंत्र को सतर्क कर दिया है। प्रारंभिक जांच में एक वायरल संक्रमण की आशंका जताई जा रही है। रिजर्व में वर्तमान में 100 से अधिक बाघ मौजूद हैं, ऐसे में संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। वन्यजीव मुख्यालय लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
बेंगलुरु से पहुंची विशेषज्ञ टीम कर रही जांच
संक्रमण के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए बेंगलुरु से विशेषज्ञों की एक टीम कान्हा पहुंची है। यह टीम वायरस के फैलाव के स्रोत, संक्रमण की श्रृंखला और उसके प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन कर रही है। विशेषज्ञों ने रिजर्व क्षेत्र और उसके आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों एवं बिल्लियों का सीरो-सर्विलांस अध्ययन कराने की सिफारिश की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं संक्रमण वन्यजीवों तक इन्हीं जानवरों के माध्यम से तो नहीं पहुंच रहा।
आवारा कुत्तों को माना जा रहा संभावित वाहक
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमित कुत्ते वायरस के प्रसार का प्रमुख माध्यम बन सकते हैं। इसी कारण रिजर्व के आसपास स्थित गांवों में रहने वाले पालतू और आवारा कुत्तों के व्यापक टीकाकरण अभियान की योजना बनाई गई है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 2500 कुत्तों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ताकि संक्रमण की संभावित श्रृंखला को तोड़ा जा सके।
पानी के स्रोतों और वन्यजीव नमूनों की होगी नियमित जांच
विशेषज्ञ दल ने सुझाव दिया है कि जंगल में मौजूद जल स्रोतों, मांसाहारी वन्यजीवों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित जांच की जाए। इसके साथ ही पर्यटक स्थलों के आसपास भोजन और कचरे के निपटान संबंधी नियमों को और कड़ा बनाने की भी सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन के अवशेष और अस्वच्छ वातावरण संक्रमण फैलाने वाले जानवरों को आकर्षित कर सकते हैं।
बाघों की निगरानी के लिए विशेष टीम गठित
मुख्य वन्यजीव वार्डन समिता राजोरा के निर्देश पर एक विशेष निगरानी दल का गठन किया गया है। इस टीम को बाघों के व्यवहार, गतिविधियों और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी बाघ में कमजोरी, लंगड़ापन, दिशा भ्रम, असामान्य आक्रामकता, शरीर पर नियंत्रण में कमी या भोजन की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल रिपोर्ट करें।
10 प्रतिशत बाघों के नमूने लेकर होगी जांच
वन विभाग ने संक्रमण की स्थिति को समझने के लिए कंटेनमेंट क्षेत्र में मौजूद लगभग 10 प्रतिशत बाघों के जैविक नमूने लेने का निर्णय लिया है। इसके लिए चयनित बाघों को सुरक्षित तरीके से ट्रैंकुलाइज कर स्वास्थ्य परीक्षण और प्रयोगशाला जांच के लिए नमूने एकत्र किए जाएंगे। इन रिपोर्टों के आधार पर संक्रमण की प्रकृति और उसके नियंत्रण की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
रिजर्व में लागू किया गया इमरजेंसी अलर्ट
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व को इमरजेंसी अलर्ट मोड में रखा गया है। कुछ पर्यटन मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संक्रमण का फैलाव सीमित रहे और बाघों सहित अन्य वन्यजीवों को किसी बड़े खतरे का सामना न करना पड़े।
भारत की बाघ संरक्षण उपलब्धि के लिए बड़ी चुनौती
भारत दुनिया में सर्वाधिक बाघों वाला देश है और कान्हा जैसे संरक्षित क्षेत्र इस संरक्षण सफलता की आधारशिला माने जाते हैं। ऐसे में किसी भी संक्रामक बीमारी का खतरा केवल एक रिजर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण प्रयासों के लिए चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते वैज्ञानिक निगरानी, टीकाकरण और सख्त जैव-सुरक्षा उपाय अपनाकर इस खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है।
सतर्कता और विज्ञान के सहारे बचाई जाएगी बाघों की आबादी
वन विभाग, पशु चिकित्सकों और वन्यजीव वैज्ञानिकों की संयुक्त कोशिशें इस समय कान्हा के बाघों की सुरक्षा पर केंद्रित हैं। संक्रमण की समय पर पहचान, निगरानी तंत्र की मजबूती और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के जरिए इस संकट से निपटने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्टें यह स्पष्ट करेंगी कि वायरस कितना गंभीर है और उससे निपटने के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाएंगे।