अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितता की जांच कर रहे विशेष जांच दल को शासन की ओर से अतिरिक्त समय प्रदान किया गया है। पहले एसआईटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट 30 जून तक प्रस्तुत करनी थी, लेकिन अब यह रिपोर्ट 15 जुलाई तक सौंपी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि मामले के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक था, जिसे शासन ने स्वीकार कर लिया है।
प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी, विस्तृत जांच की जरूरत बताई
एसआईटी प्रमुख एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने टीम के अन्य सदस्यों किरण एस. तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न कुमार के साथ प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में जांच की अब तक की प्रगति का उल्लेख करते हुए कई बिंदुओं पर और गहन पड़ताल की आवश्यकता जताई गई है। साथ ही विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय और आवश्यक संसाधनों की मांग भी की गई थी।
सुरक्षा और चढ़ावा प्रबंधन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
प्रारंभिक जांच के दौरान एसआईटी ने मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, चढ़ावे के संग्रह और प्रबंधन की मौजूदा प्रणाली का व्यापक परीक्षण किया है। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के अलावा 150 से अधिक लोगों से पूछताछ की, सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया और पूरी प्रक्रिया का तकनीकी मूल्यांकन भी किया। प्रारंभिक रिपोर्ट में व्यवस्था से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल जरूर उठाए गए हैं, लेकिन फिलहाल किसी भी व्यक्ति या संस्था को प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
जांच का दायरा बढ़ा, कई स्तरों पर होगी जवाबदेही तय
सूत्रों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट में विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण किया जा सकता है। जांच का दायरा बढ़ाए जाने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों, चढ़ावा प्रबंधन में शामिल कर्मचारियों तथा बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े संबंधित अधिकारियों की भूमिका का भी विस्तार से परीक्षण किया जाएगा। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पूरी प्रक्रिया में कहीं प्रशासनिक या व्यवस्थागत चूक तो नहीं हुई।
दानपात्र से कम राशि मिलने के बाद बना था जांच का आधार
यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब मंदिर के दानपात्र में प्राप्त चढ़ावे की गिनती के दौरान अपेक्षा से कम राशि मिलने की बात सामने आई। इसके बाद शासन ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। अब 15 जुलाई तक प्रस्तुत होने वाली अंतिम रिपोर्ट पर प्रशासन, ट्रस्ट, श्रद्धालुओं और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और जवाबदेही तय होने की संभावना है।