बागेश्वर : जिले में खड़िया खनन का मामला अब महज पहाड़ से खड़िया निकालने और खनन कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है। खड़िया खनन से जुड़ी व्यवस्था करोड़ों रुपये की धनराशि और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। करीब दो साल से नैनीताल हाईकोर्ट में चल रहे मामले के बीच खनन कारोबारियों के सामने रोजगार और कारोबार का संकट खड़ा है वहीं खड़िया और नदी खनन से जुड़े फंड में जमा करोड़ों रुपये के इस्तेमाल को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
दो साल से हाईकोर्ट में मामला
बागेश्वर में खड़िया खनन को लेकर विवाद लंबे समय से जारी है। मामला करीब दो वर्षों से नैनीताल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस कानूनी पेच के चलते खड़िया खनन से जुड़े कारोबारियों और इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
खनन गतिविधियों पर असर पड़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। खड़िया खनन बागेश्वर की अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण कारोबारों में शामिल रहा है इसलिए इस मामले का असर केवल खनन कारोबारियों तक सीमित नहीं माना जा रहा।
28 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा
इसी बीच खनन से जुड़े फंड में जमा धनराशि के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। कांग्रेस की ओर से बागेश्वर में करीब 28 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया जा रहा है।
कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता इस मुद्दे को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका सवाल है कि खनिज न्यास निधि समेत खनन से संबंधित धनराशि का इस्तेमाल किन कार्यों में किया गया और इसके पीछे पूरी प्रक्रिया क्या रही।
हालांकि 28 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है।
खनिज न्यास निधि के इस्तेमाल पर सवाल
खड़िया और नदी खनन से जुड़े फंड में जमा करोड़ों रुपये के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जनता और विपक्ष की ओर से यह जानने की मांग की जा रही है कि इन निधियों को किन योजनाओं और विकास कार्यों पर खर्च किया गया।
सवाल यह भी है कि क्या संबंधित फंड के उपयोग में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया यदि धनराशि का इस्तेमाल नियमों के अनुसार हुआ है तो उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा और यदि किसी तरह की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी
कारोबार से आगे बढ़ा मामला
खड़िया खनन का मामला अब बागेश्वर में सिर्फ कारोबारी संकट नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती में बदलता दिखाई दे रहा है।
एक तरफ खनन कारोबार से जुड़े लोग अपने रोजगार और भविष्य को लेकर चिंतित हैं वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल खनन निधि और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की कार्यवाही और शासन के रुख पर सभी की नजर रहेगी। इसके साथ ही खनन से जुड़े फंड में जमा धनराशि और उसके इस्तेमाल का पूरा हिसाब भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
अब जनता मांग रही हिसाब
बागेश्वर में खड़िया खनन को लेकर मौजूदा विवाद ने कई सवाल एक साथ खड़े कर दिए हैं। खनन कारोबार कब सामान्य होगा? हाईकोर्ट में मामले का क्या रुख रहेगा खनन से जुड़े करोड़ों रुपये के फंड का इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ? और 28 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों की सच्चाई क्या है
इन सवालों के जवाब अब प्रशासन और शासन के रुख के साथ-साथ न्यायालय की कार्यवाही और उपलब्ध दस्तावेजों से ही सामने आएंगे। फिलहाल बागेश्वर की जनता की नजर उस पूरे हिसाब पर है जिसे लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।