कोलकाता: देश की राजनीति में एक नए राजनीतिक मंच की शुरुआत की तैयारी है। महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से ‘आजाद हिंद पार्टी’ के गठन का ऐलान किया है। पार्टी का दावा है कि वह पारंपरिक और जाति आधारित राजनीति से अलग हटकर युवाओं की भागीदारी और देश निर्माण को प्राथमिकता देगी।
युवाओं की नाराजगी बनी नई पार्टी की वजह
चंद्र कुमार बोस के मुताबिक, देश का एक बड़ा युवा वर्ग मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और पारंपरिक राजनीतिक दलों की कार्यशैली से निराश है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर Gen Z युवाओं की ओर से बदलाव की मांग और विरोध के तेवरों ने उन्हें एक नए राजनीतिक मंच की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
नई पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी व्यवस्थाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ युवाओं को राजनीतिक रूप से सक्रिय करने पर जोर देगी।
21 अक्टूबर को होगा औपचारिक ऐलान
‘आजाद हिंद पार्टी’ की औपचारिक लॉन्चिंग 21 अक्टूबर को ‘आजाद हिंद दिवस’ के मौके पर किए जाने की तैयारी है। इसी तारीख को 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार के गठन की घोषणा की थी। पार्टी के लिए इस ऐतिहासिक दिन का चुनाव नेताजी की विरासत और विचारधारा से जुड़ाव को भी दर्शाता है।
चुनावी राजनीति से दूर रहेंगे चंद्र कुमार बोस
इस पहल में चंद्र कुमार बोस खुद सीधे तौर पर पारंपरिक चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय संरक्षक और मार्गदर्शक (Mentor) की भूमिका निभाएंगे। पार्टी के संचालन में युवाओं, कॉलेज छात्रों और सिविल सोसायटी से जुड़े लोगों की अहम भूमिका रहने की बात कही गई है।
सर्वधर्म समभाव और समावेशी भारत पर जोर
पार्टी का वैचारिक आधार नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘सर्वधर्म समभाव’ और समावेशी भारत के विचारों पर केंद्रित बताया गया है। पार्टी का लक्ष्य देश के अलग-अलग वर्गों को समान अधिकार और सम्मान दिलाने के साथ युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना है।
बंगाल से राष्ट्रीय स्तर तक विस्तार की तैयारी
‘आजाद हिंद पार्टी’ की शुरुआत पश्चिम बंगाल से होने के बावजूद इसके राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की योजना बताई जा रही है। पार्टी के जरिए देशभर के युवाओं को जोड़ने की तैयारी है। अब नजर इस बात पर होगी कि नेताजी की विरासत और Gen Z की राजनीतिक ऊर्जा का यह नया मेल भारतीय राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाता है।