कोलकाता: कोलकाता की पहचान सिर्फ दुर्गा पूजा ही नहीं, बल्कि काली पूजा की ऐतिहासिक परंपरा से भी जुड़ी है। उत्तर में दक्षिणेश्वर से लेकर दक्षिण में कालीघाट तक, मां काली के कई प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। इन्हीं में उत्तर कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट इलाके में आयोजित होने वाली फटाकेष्ट काली पूजा भी शामिल है। इस बार पूजा अपने 69वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। हालांकि, चोरबागान में दुर्गा पूजा के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद इस बार यहां सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
69वें वर्ष में फटाकेष्ट काली पूजा, दशकों पुरानी है परंपरा
फटाकेष्ट काली पूजा की शुरुआत कभी कोलकाता के चर्चित नेता कृष्णचंद्र दत्त उर्फ फटाकेष्ट के हाथों हुई थी। दशकों से यह पूजा लोगों की आस्था, भावनाओं और परंपरा का प्रतीक बनी हुई है। आकर्षक रोशनी, आधुनिक साउंड सिस्टम और भव्य आयोजन के कारण इस पूजा ने कम समय में ही खास पहचान बना ली थी। आज भी मां काली के दर्शन के लिए कोलकाता के अलावा पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अमिताभ बच्चन से देव आनंद तक, कई दिग्गजों से जुड़ी है पूजा की यादें
फटाकेष्ट काली पूजा का इतिहास फिल्मी सितारों की मौजूदगी के लिए भी जाना जाता है। प्रचलित जानकारियों के मुताबिक, एक समय इस पूजा में अमिताभ बच्चन, देव आनंद, राजेश खन्ना और हेमा मालिनी जैसी हिंदी फिल्म जगत की हस्तियां पहुंची थीं। बंगाली सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार और अभिनेत्री सुप्रिया देवी का नाम भी इस पूजा से जुड़ा रहा है। वहीं, आशा भोसले और बप्पी लाहिड़ी जैसे संगीतकारों के भी यहां आने की चर्चा रही है। समय के साथ कई बदलाव हुए, लेकिन पूजा के प्रति लोगों की श्रद्धा और उत्साह आज भी कायम है।
प्रतिमा के दर्शन के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु
काली पूजा से पहले जब मां काली की प्रतिमा कुम्हारटोली से पूजा मंडप की ओर लाई जाती है, तब भी रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। लोग मां के दर्शन करने और उन्हें फूलों की माला अर्पित करने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। करीब सात दशकों से चली आ रही यह परंपरा फटाकेष्ट काली पूजा को उत्तर कोलकाता के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है।
चोरबागान हादसे के बाद सुरक्षा पर विशेष जोर
हाल ही में कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा में हुए दर्दनाक हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद त्योहारों के दौरान भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में फटाकेष्ट काली पूजा में भी विशेष सतर्कता बरतने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि दर्शन के दौरान भीड़ का दबाव बढ़ने पर किसी तरह की अफरा-तफरी या अप्रिय घटना न हो।
संकरी सड़क पर उमड़ती है भारी भीड़, पुलिस और आयोजकों की बैठक
उत्तर कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट इलाके की सीताराम घोष स्ट्रीट में फटाकेष्ट काली पूजा का आयोजन होता है। सड़क अपेक्षाकृत संकरी है और दोनों तरफ मकान तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। सामान्य दिनों में भी यहां वाहनों की आवाजाही रहती है। काली पूजा के दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगती है, जिससे लोगों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इसी को देखते हुए पुलिस और पूजा आयोजकों के बीच बैठक आयोजित करने की तैयारी है। इसमें प्रवेश और निकास मार्ग, भीड़ नियंत्रण, स्वयंसेवकों की तैनाती और आपात स्थिति से निपटने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
मंडप से निकलने का रास्ता चौड़ा करने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, इस बार पूजा मंडप से बाहर निकलने वाले रास्ते को पहले की तुलना में चौड़ा करने की पहल की जा रही है। इस पूजा में मां काली की प्रतिमा को सड़क से कुछ फीट ऊंचे मंच पर स्थापित किया जाता है। मंच के नीचे से दर्शनार्थियों के आने-जाने के लिए रास्ता बनाया जाता है। श्रद्धालु मां के दर्शन करने के बाद इसी रास्ते से आगे निकलते हैं। ऐसे में भीड़ के दबाव को कम करने और आवाजाही को सुचारु बनाए रखने के लिए निकास व्यवस्था को और बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है।
बैरिकेडिंग और ट्रैफिक नियंत्रण पर भी विचार
पूजा के दौरान सड़क पर भीड़ जमा होने और धक्का-मुक्की की आशंका को देखते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही इलाके में यातायात नियंत्रित करने और पुलिस की निगरानी बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। भीड़ बढ़ने की स्थिति में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखना और आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी। हालांकि, इन व्यवस्थाओं के अंतिम स्वरूप की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है।
आयोजकों का दावा, भीड़ संभालने का है अनुभव
पूजा आयोजकों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं। क्लब के सदस्यों और स्वयंसेवकों को भीड़ संभालने का अनुभव है। इसी अनुभव के आधार पर इस बार भी सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी। चोरबागान हादसे का जिक्र करते हुए पूजा आयोजकों के एक वर्ग ने वहां भीड़ प्रबंधन और स्वयंसेवकों की तैयारी पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, फटाकेष्ट काली पूजा में किसी भी अप्रिय घटना को रोकना ही आयोजकों और प्रशासन की प्राथमिकता होगी।
परंपरा के साथ सुरक्षा की चुनौती
फटाकेष्ट काली पूजा के 69वें वर्ष में इस बार भव्य आयोजन के साथ सुरक्षा भी एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। चोरबागान हादसे के बाद पुलिस, पूजा आयोजकों और स्वयंसेवकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह को बरकरार रखते हुए भीड़ को किस तरह व्यवस्थित किया जाता है। आखिरकार, त्योहार की असली खुशी तभी है, जब हर श्रद्धालु मां काली के दर्शन के बाद सुरक्षित अपने घर लौटे।