कोलकाता: पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक परमब्रत चटर्जी (Parambrata Chatterjee) और दिग्गज अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी (Swastika Mukherjee) की मुश्किलें कानूनी पचड़े में फंसने के कारण काफी बढ़ गई हैं। साल 2021 के चुनाव के बाद भड़की हिंसा और सोशल मीडिया पर 'उकसावा' देने के आरोप में कोलकाता के गरियाहाट थाने में दोनों सितारों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। गरियाहाट थाने की पुलिस ने इस मामले की जांच भी शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों कलाकारों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 और 153A के तहत मामला दर्ज किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि धारा 153A (धार्मिक या क्षेत्रीय आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना) एक गंभीर और गैर-जमानती (Non-Bailable) धारा है। चूंकि यह मामला साल 2021 का है, इसलिए इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) के बजाय तत्कालीन कानून यानी भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत मामला कायम किया गया है।
कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ 5 साल पुरानी है। जयदीप सेन नामक एक वकील ने गरियाहाट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि 2 मई 2021 को जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो रहे थे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत लगभग साफ हो चुकी थी, तब परमब्रत चटर्जी ने फेसबुक/सोशल मीडिया पर एक बेहद सांकेतिक और उकसाऊ पोस्ट लिखी थी। परमब्रत ने लिखा था— "आज विश्व रगड़ानी दिवस (रगड़ने का दिन) घोषित किया जाए।" इस पोस्ट पर सहमति जताते हुए अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी ने कमेंट बॉक्स में लिखा था— "होक होक" (ऐसा ही हो)। हाल ही में राजारहाट-गोपालपुर से बीजेपी विधायक तरुणज्योति तिवारी ने 5 साल पुराने इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया, जिसके बाद वकील जयदीप सेन ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और अब यह शिकायत एफआईआर में बदल चुकी है।
सत्ता बदलते ही परमब्रत के बदले सुर?
इस पूरे कानूनी घटनाक्रम के बीच टॉलीवुड गलियारों में परमब्रत चटर्जी के बदलते राजनीतिक स्टैंड को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ समय पहले तक परमब्रत को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के कंधे से कंधा मिलाकर चलते देखा गया था। वे सेंट्रल फोर्सेस (SIR) के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराने वाले प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा थे। लेकिन राज्य में हालिया राजनीतिक बदलाव (सत्ता परिवर्तन) के बाद उनके सुर अचानक बदल गए हैं। बुधवार को जब शिबपुर से बीजेपी विधायक रुद्रनील घोष राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में तकनीशियन स्टूडियो (Technician Studio) पहुंचे, तो वहां परमब्रत चटर्जी, निर्देशक सृजित मुखर्जी और निर्माता निशपाल सिंह राणे (टीएमसी सांसद व कोयल मल्लिक के पति) मौजूद थे। उस बैठक में परमब्रत को कथित तौर पर तृणमूल शासनकाल की कमियों और व्यवस्था की आलोचना करते हुए सुना गया। अब टॉलीवुड और राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जो कलाकार कल तक टीएमसी के साथ खड़े थे, वे पाला बदलते ही 'बेसुरे' क्यों हो गए? क्या राजनीतिक दलों की तरह टॉलीवुड के कलाकार भी हवा का रुख देखकर अपना रंग बदल रहे हैं? बहरहाल, रंग बदलने की इस चर्चा के बीच अब परमब्रत और स्वास्तिका को पुलिसिया तफ्तीश का सामना करना होगा।