कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हुमायूँ कबीर ने अपनी पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के बीच गठबंधन को औपचारिक रूप दे दिया है।
कबीर ने ओवैसी को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी और यह गठबंधन लंबे समय तक कायम रहेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा, “यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा।”
कबीर के अनुसार, दोनों दल जल्द ही 182 से 192 उम्मीदवारों की संयुक्त सूची जारी करेंगे। साथ ही, ओवैसी कम से कम 20 चुनावी रैलियों में हिस्सा लेंगे। पहली बड़ी रैली 1 अप्रैल को बहरामपुर में आयोजित होगी, जहां दोनों नेता एक साथ मंच साझा करेंगे।
यह गठबंधन मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम, आसनसोल और कोलकाता जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देगा, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नया समीकरण ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC के लिए चुनौती बन सकता है। अब तक मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा हिस्सा TMC के साथ रहा है, लेकिन AIMIM की एंट्री से वोटों का बंटवारा संभव है।
वहीं विपक्ष ने इस गठबंधन की आलोचना करते हुए इसे “ध्रुवीकरण की राजनीति” बताया है। TMC नेताओं का आरोप है कि इससे “धर्मनिरपेक्ष वोट” कमजोर हो सकते हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन चुनावी मैदान में कितना प्रभाव डाल पाता है और क्या यह वास्तव में बंगाल की राजनीति का समीकरण बदल पाएगा।