कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों जनता दरबार, ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ और खाद्य सुरक्षा अभियान को लेकर चर्चा तेज है। भाजपा नेत्री लॉकेट चटर्जी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के जनता दरबार की तारीफ करते हुए दावा किया कि यहां अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे लोगों को सुनवाई के बाद संतुष्टि और भरोसे का एहसास हो रहा है। लॉकेट चटर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री लोगों की शिकायतें सीधे सुन रहे हैं और उनके संपर्क नंबर तक दर्ज कर रहे हैं, ताकि समस्याओं पर आगे कार्रवाई की जा सके। उन्होंने इसे जनता और सरकार के बीच सीधे संवाद की दिशा में बड़ा बदलाव बताया। हालांकि, जनता दरबार के जरिए कितने मामलों का समाधान हुआ है, इसका स्वतंत्र आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है।
‘लोग सुकून लेकर लौट रहे हैं’, जनता दरबार पर लॉकेट का दावा
लॉकेट चटर्जी ने दावा किया कि जनता दरबार में आने वाले लोगों की समस्याओं को मुख्यमंत्री व्यक्तिगत तौर पर सुन रहे हैं। उनके मुताबिक, लोगों की शिकायतें दर्ज करने के साथ संपर्क नंबर भी लिए जा रहे हैं, ताकि प्रशासनिक स्तर पर आगे कार्रवाई की जा सके। भाजपा नेत्री ने इस व्यवस्था को पूर्ववर्ती सरकारों से अलग बताते हुए राजनीतिक हमला भी बोला। उन्होंने वाममोर्चा के 34 साल और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का जिक्र करते हुए कहा कि इतने लंबे समय में आम लोगों और सरकार के बीच ऐसा सीधा संवाद नहीं था। यह बयान राजनीतिक आरोप के तौर पर देखा जा रहा है। लॉकेट चटर्जी ने जनता दरबार को मौजूदा सरकार की जवाबदेही और जनसुनवाई की नई शैली के तौर पर पेश किया।
आज ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’, गोलपार्क से जादवपुर तक मार्च
इसी बीच बुधवार, 9 सितंबर को कोलकाता में ‘Saffron Samman Yatra’ आयोजित की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी गोलपार्क से जादवपुर तक प्रस्तावित इस मार्च का नेतृत्व करेंगे। यात्रा गोलपार्क से शुरू होकर धाकुरिया होते हुए जादवपुर के 8बी बस स्टैंड तक पहुंचने वाली है। भाजपा की ओर से इस कार्यक्रम को गेरुआ रंग से जुड़े सम्मान, त्याग और सनातन परंपरा के संदेश से जोड़ा गया है। आयोजकों को बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पुलिस ने भी भीड़ और यातायात को देखते हुए आवश्यक व्यवस्था की है। लॉकेट चटर्जी ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि गेरुआ रंग और संत परंपरा के प्रति अपमानजनक रवैये को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनके मुताबिक, यात्रा के जरिए इसी सांस्कृतिक और धार्मिक सम्मान का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
रेस्तरां पर कार्रवाई का समर्थन, खाद्य सुरक्षा को बताया अहम मुद्दा
लॉकेट चटर्जी ने कोलकाता और राज्य के दूसरे हिस्सों में चल रहे खाद्य सुरक्षा अभियानों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग खाने-पीने के शौकीन हैं और परिवार के साथ रेस्तरां में भोजन करना यहां की संस्कृति का हिस्सा है। ऐसे में खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता से समझौता नहीं किया जा सकता। दरअसल, सितंबर की शुरुआत से पश्चिम बंगाल में रेस्तरां, होटल, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर जांच तेज हुई है। अधिकारियों ने कई जगह खराब स्वच्छता, बासी खाद्य सामग्री, खराब तेल और एक्सपायर्ड मांस-मछली से जुड़े उल्लंघन पाए हैं। कोलकाता के कुछ प्रतिष्ठानों में कथित तौर पर खराब या फफूंद लगे मांस और अन्य अस्वास्थ्यकर खाद्य सामग्री भी मिली। टेंगरा के एक रेस्तरां से करीब 500 किलो मांस और मछली जब्त किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
पूजा से पहले खाद्य सुरक्षा पर बढ़ी सख्ती
दुर्गा पूजा नजदीक होने के कारण कोलकाता के रेस्तरां और खाद्य प्रतिष्ठानों में ग्राहकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए प्रशासन खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ा रहा है। 6 सितंबर को राज्यभर में प्रवर्तन टीमों ने रेस्तरां और खाने-पीने की दुकानों का निरीक्षण किया था। पार्क स्ट्रीट समेत कोलकाता के कई चर्चित रेस्तरां भी जांच के दायरे में आए। अधिकारियों ने साफ किया कि इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी। लॉकेट चटर्जी ने इसी कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।