उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों के लिए इस बार दुर्गा पूजा की खुशियां दोगुनी हो गई हैं। सोमवार को उत्तर बंगाल दौरे के दौरान उत्तरकन्या में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद चाय बागान कर्मचारियों के लिए 20 प्रतिशत बोनस देने का बड़ा ऐलान किया गया। यह राशि 5 अक्टूबर तक श्रमिकों के खातों और हाथों तक पहुंचा दी जाएगी। खास बात यह है कि इस बार पहाड़ (पर्वतीय क्षेत्रों) और समतल (मैदानी क्षेत्रों) दोनों ही इलाकों के चाय बागान श्रमिकों को एक समान 20 फीसदी बोनस मिलेगा।
खराब मौसम के कारण कॉप्टर की लैंडिंग टली, उत्तरकन्या में हुई बैठक
सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कालिमपोंग में एक सरकारी समारोह में शामिल होना था। हालांकि, उत्तर बंगाल में खराब मौसम के कारण कॉप्टर की लैंडिंग संभव नहीं हो सकी। इसके बाद सिलीगुड़ी स्थित राज्य सचिवालय 'उत्तरकन्या' लौटकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। इस बैठक में पहाड़ के बुनियादी ढांचे, विकास कार्यों और हालिया भूस्खलन की स्थिति से निपटने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बंद पड़े चाय बागानों को फिर से खोलने की प्रतिबद्धता
बैठक के दौरान चाय उद्योग की स्थिति सुधारने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान स्पष्ट किया गया कि पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े चाय बागानों को पुनर्जीवित करने के लिए त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य बंद बागानों को जल्द से जल्द खोलकर स्थानीय श्रमिकों को उनका रोजगार वापस दिलाना है, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।
चाय श्रमिकों की समस्याओं के स्थायी समाधान पर बल
गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से उत्तर बंगाल के चाय बागान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। कई बागानों में तालाबंदी, मजदूरी के भुगतान में देरी और मालिक-श्रमिक विवादों के कारण मजदूर परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। पूर्व में त्योहारों के समय मिलने वाले बोनस को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती थी। अब सभी श्रमिकों को समान बोनस देने और बागानों के व्यवस्थित संचालन के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं।
5 अक्टूबर तक मिलेगा बोनस, बागानों में खुशी का माहौल
त्योहारों से ठीक पहले 20 प्रतिशत बोनस की घोषणा होते ही उत्तर बंगाल के चाय बागानों में उत्सव और खुशी का माहौल है। प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, 5 अक्टूबर की तय समय-सीमा के भीतर बोनस वितरण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिससे हजारों मजदूर परिवार बिना किसी आर्थिक तंगी के दुर्गा पूजा मना सकेंगे।