कोलकाता: काली पूजा और दीपावली को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क है। आगजनी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पटाखों से लेकर फानूस उड़ाने तक कई तरह की गाइडलाइंस जारी की गई हैं। लेकिन सरकार के इन निर्देशों के चलते उत्तर कोलकाता के कई पुराने और प्रतिष्ठित परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, उत्तर कोलकाता की ऐतिहासिक काली पूजा और फानूस उत्सव का रिश्ता काफी पुराना है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा पर अब सरकारी पाबंदियों का साया मंडराने लगा है। परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती परंपरा को निभाने के लिए जरूरी अनुमति हासिल करना है।
काली पूजा और फानूस उत्सव का सदियों पुराना रिश्ता
उत्तर कोलकाता की पारंपरिक काली पूजा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में से एक है काली पूजा की रात फानूस उड़ाने का उत्सव। शहर के कई पुराने और प्रतिष्ठित परिवारों में यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है। काली पूजा की रात घरों की छतों से रंग-बिरंगे और आकर्षक फानूस आसमान में छोड़े जाते हैं। परिवार के सदस्य इस आयोजन की तैयारियां कई दिनों पहले से शुरू कर देते हैं। खास बात यह है कि इन फानूसों को बाजार से खरीदने के बजाय परिवार के लोग खुद अपने हाथों से तैयार करते हैं। करीब सौ साल से भी अधिक पुरानी इस परंपरा को परिवार अपनी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हैं।
हाथों से तैयार होते हैं कलात्मक और आकर्षक फानूस
उत्तर कोलकाता के पुराने परिवारों में फानूस तैयार करना भी किसी कला से कम नहीं है। इन फानूसों को बनाने में कागज, बांस और अन्य जरूरी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका आकार सामान्य फानूसों से काफी बड़ा होता है और इन्हें अलग-अलग विषयों और कल्पनाओं के आधार पर डिजाइन किया जाता है। कई फानूसों में सामाजिक संदेश, ऐतिहासिक घटनाओं और खास कहानियों को कलात्मक तरीके से दर्शाया जाता है। परिवार के सदस्य मिलकर इनकी डिजाइनिंग और निर्माण का काम करते हैं। यही वजह है कि हर साल फानूस उत्सव को लेकर परिवारों में खास उत्साह देखने को मिलता है। इस साल भी काली पूजा से पहले तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन सरकारी दिशा-निर्देशों ने आयोजकों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकारी गाइडलाइंस ने बढ़ाई आयोजकों की परेशानी
राज्य सरकार की ओर से काली पूजा और दीपावली के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फानूस उड़ाने पर सख्त नियम लागू किए गए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, बिना जरूरी अनुमति और लाइसेंस के फानूस उड़ाने की इजाजत नहीं होगी। इसके लिए आयोजकों को पहले दमकल विभाग और संबंधित स्थानीय पुलिस थाने से अनुमति लेनी होगी। प्रशासन का उद्देश्य फानूस के कारण होने वाली आगजनी और अन्य संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है। दरअसल, पहले भी आसमान में उड़ाए गए फानूस के कारण कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे हादसों से जान-माल के नुकसान की आशंका बनी रहती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती दिखाई है। हालांकि, इन नियमों के चलते पारंपरिक फानूस उत्सव आयोजित करने वाले परिवारों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
पारंपरिक फानूस और चीनी फानूस को एक नजर से देखने पर नाराजगी
सरकारी निर्देशों को लेकर फानूस उत्सव से जुड़े परिवारों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। आयोजकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने हाथों से फानूस तैयार कर निर्धारित सावधानियों के साथ यह आयोजन करते आ रहे हैं। उनके मुताबिक, पारंपरिक तरीके से बनाए जाने वाले फानूस और बाजार में बिकने वाले तैयार चीनी फानूस में काफी अंतर है। परिवारों का दावा है कि उनके आयोजन के कारण कभी किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति पैदा नहीं हुई है। उनका आरोप है कि पहले बाजार में उपलब्ध चीनी फानूस से ही आगजनी और हादसों का खतरा अधिक पैदा हुआ है। ऐसे में पारंपरिक फानूस उत्सव को भी उसी श्रेणी में रखकर प्रतिबंधित करना उचित नहीं है। परिवारों की मांग है कि प्रशासन पारंपरिक आयोजनों की प्रकृति को समझते हुए उनके लिए अलग व्यवस्था तैयार करे।
अनुमति लेने पहुंचे आयोजकों को भी नहीं मिल रही राहत
सरकारी गाइडलाइंस सामने आने के बाद फानूस उत्सव के आयोजकों ने नियमों का पालन करते हुए अनुमति लेने की कोशिश भी शुरू कर दी है। लेकिन इस प्रक्रिया में भी उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आयोजकों का आरोप है कि जब वे आवेदन जमा कराने के लिए दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस थानों में पहुंचे, तो वहां आवेदन स्वीकार करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं मिली। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि अनुमति के लिए आवेदन किस अधिकारी के पास और किस प्रक्रिया के तहत जमा किया जाए। आवेदन से संबंधित स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। परिवारों का कहना है कि वे प्रशासन के नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहते और विधिवत अनुमति लेकर ही आयोजन करना चाहते हैं। इसके बावजूद आवेदन प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं होने से उनकी तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।
सुरक्षा के साथ परंपरा बचाने की मांग, प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरें
फिलहाल उत्तर कोलकाता के पुराने परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वे अपनी वर्षों पुरानी परंपरा को कैसे जारी रखेंगे। एक तरफ प्रशासन आगजनी और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा नियमों में किसी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है, तो दूसरी तरफ परिवार अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखना चाहते हैं। आयोजकों का कहना है कि सुरक्षा के सभी जरूरी मानकों का पालन करने के लिए वे तैयार हैं। हालांकि, इसके लिए प्रशासन को एक स्पष्ट और सरल अनुमति प्रक्रिया बनानी चाहिए। साथ ही पारंपरिक फानूस उत्सव के लिए उचित दिशा-निर्देश और वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकालता है या नहीं। फिलहाल सौ साल से अधिक पुरानी इस परंपरा का भविष्य प्रशासन के अगले कदम पर टिका हुआ है।