कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के चर्चित मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने नए सिरे से शुरू कर दी है। अदालत के निर्देश और पीड़ित परिवार की याचिका के बाद सोमवार दोपहर सीबीआई की 5 सदस्यीय नई विशेष जांच टीम (SIT) अस्पताल के इमरजेंसी ब्लॉक पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया।सीबीआई के संयुक्त निदेशक अनुराग कुमार और वित्तीय भ्रष्टाचार मामले के जांच अधिकारी मनीष उपाध्याय के नेतृत्व में बनी इस नई एसआईटी के साथ दिल्ली से आई 4 सदस्यीय विशेष टीम भी मौजूद रही। इस दौरान वीडियोग्राफरों की उपस्थिति में क्राइम सीन का विस्तृत री-क्रिएशन किया गया और हर पहलू को दर्ज किया गया।
नए जांच अधिकारी के हाथों में कमान, 1000 पन्नों की फाइलें खंगाल रही टीम
हाल ही में शियालदह अदालत में सीबीआई द्वारा सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, इस केस के जांच अधिकारी (IO) को बदल दिया गया है। पूर्व आईओ सीमा पहुजा की जगह अब संदीपनी गर्ग को नया जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
सीबीआई ने अदालत को सूचित किया है कि नई टीम केस डायरी सहित 1000 से अधिक पन्नों के दस्तावेजों की गहराई से समीक्षा कर रही है। पीड़िता की मां ने नए जांच अधिकारी से मांग की है कि घटना से ठीक पहले उनकी बेटी से मिलने वाले सभी लोगों से सख्ती से पूछताछ की जाए, जिस पर अधिकारियों ने उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
टीएमसी नेता निर्मल घोष की भूमिका और पानीहाटी श्मशान पर भी नजर
जांच एजेंसी अब घटना के बाद के घटनाक्रमों की भी नए सिरे से कड़ियां जोड़ रही है। सीबीआई के रडार पर उस समय अस्पताल में पहुंचे टीएमसी नेता निर्मल घोष की गतिविधियां हैं। जांच अधिकारी इस बात का पता लगा रहे हैं कि घोष ने वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों से क्या बात की थी और शव को पानीहाटी श्मशान घाट ले जाने से पहले उन्होंने किन-किन लोगों से संपर्क साधा था।हाल ही में सीबीआई की टीम ने पानीहाटी श्मशान घाट जाकर अधिकारियों के बयान दर्ज किए थे। अब इन बयानों और घटनास्थल के साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर अस्पताल के सेमिनार रूम से ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर का शव मिला था। शुरुआत में कोलकाता पुलिस ने नागरिक स्वयंसेवक (सिविक वॉलंटियर) संजय रॉय को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। अब दिल्ली से आई विशेष टीम और नए आईओ के निरीक्षण से यह देखा जा रहा है कि पुरानी जांच में कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य या पहलू छूट तो नहीं गया था।