कोलकाता: सुरेंद्रनाथ कॉलेज में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच वाइस प्रिंसिपल ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, कॉलेज से बाहर निकलते समय वाइस प्रिंसिपल ने साफ कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि उन्हें जबरन पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।
वाइस प्रिंसिपल के बाहर निकलते ही छात्रों में जश्न
वाइस प्रिंसिपल के कॉलेज से बाहर निकलते ही परिसर के बाहर छात्रों में उत्साह देखने को मिला। छात्रों ने गंगाजल और धूप लेकर कॉलेज परिसर का शुद्धिकरण किया। इस दौरान छात्रों ने अपनी लंबे समय से चली आ रही शिकायतों और मांगों को लेकर भी अपनी बात रखी।
98 फीसदी छात्रों की अटेंडेंस हटाने का आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि करीब 98 प्रतिशत विद्यार्थियों के नाम अटेंडेंस से हटा दिए गए हैं। छात्रों का कहना है कि कई विद्यार्थी कॉलेज आ रहे थे, इसके बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि अटेंडेंस के लिए कोई व्यवस्थित रजिस्टर नहीं था और सफेद कागज पर उपस्थिति दर्ज की जाती थी।
नियमित क्लास नहीं होने का भी आरोप
छात्रों का आरोप है कि कॉलेज में नियमित रूप से कक्षाएं भी नहीं ली जाती थीं। विद्यार्थियों का दावा है कि इन तमाम समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में छात्रों की अटेंडेंस प्रभावित हुई और अब उनके सामने परीक्षा में बैठने का संकट खड़ा हो गया है।
टीएमसीपी की बैठकों में जाने का बनाया जाता था दबाव?
छात्रों ने वाइस प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें कथित तौर पर टीएमसीपी की बैठकों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता था। छात्रों का दावा है कि बैठकों में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को ही अटेंडेंस दिए जाने की बात कही जाती थी।
गवर्निंग बॉडी के नए अध्यक्ष से करेंगे बात
परीक्षा में बैठने के मुद्दे पर छात्रों ने बताया कि गवर्निंग बॉडी के नए अध्यक्ष कौस्तव बागची पहले ही एक प्रस्ताव तैयार कर चुके हैं। छात्रों के मुताबिक, प्रस्ताव में प्रिंसिपल से इस बार विद्यार्थियों को बिना किसी जुर्माने के परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की बात कही गई थी।
छात्रों का आरोप है कि इस प्रस्ताव पर वाइस प्रिंसिपल ने सहमति नहीं दी। अब उनके पद छोड़ने के बाद छात्र परीक्षा में बैठने की अनुमति को लेकर गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष कौस्तव बागची से बातचीत करेंगे।
वाइस प्रिंसिपल ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, छात्रों की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को वाइस प्रिंसिपल ने खारिज किया है। उनका कहना है कि छात्र नियमित रूप से कॉलेज नहीं आते थे और इसी वजह से उनकी अटेंडेंस दर्ज नहीं की गई।
फिलहाल वाइस प्रिंसिपल के इस्तीफे के बाद छात्रों की नजर अब गवर्निंग बॉडी के अगले फैसले पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अटेंडेंस की समस्या से जूझ रहे छात्रों को आगामी परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलती है या नहीं।