कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार नई औद्योगिक नीति लाने जा रही है। इस नीति का एक अहम पहलू रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन व्यवस्था है। इसके तहत कंपनियों को अधिक लोगों को नौकरी देने पर अतिरिक्त सरकारी सहायता मिल सकती है। खास बात यह है कि महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को रोजगार देने वाली औद्योगिक इकाइयों भी विशेष प्रोत्साहन का प्रस्ताव है।
रोजगार देने वाली कंपनियों को मिलेगा आर्थिक प्रोत्साहन
नई औद्योगिक नीति में सरकार का जोर केवल निवेश आकर्षित करने पर नहीं, बल्कि निवेश के जरिए अधिक से अधिक रोजगार पैदा करने पर है। प्रस्ताव के मुताबिक, किसी औद्योगिक इकाई में जितने अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, उसे उसी अनुपात में अधिक सरकारी प्रोत्साहन दिया जा सकता है। यानी रोजगार सृजन को सरकारी सहायता का प्रमुख आधार बनाने की तैयारी है।
कर्मचारियों के PF का खर्च उठाने में मदद करेगी सरकार
इस नीति के तहत कंपनियों पर कर्मचारियों के भविष्य निधि (EPF) में नियोक्ता के योगदान का आर्थिक बोझ कम करने का प्रस्ताव है। इसके लिए सरकार एक निश्चित अवधि तक कंपनियों के EPF योगदान का कुछ हिस्सा वापस कर सकती है।
प्रस्तावित व्यवस्था के उदाहरण के अनुसार, यदि कोई कंपनी 100 लोगों को रोजगार देती है तो उसके कर्मचारियों के PF पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत तक हिस्सा सरकार वहन कर सकती है। वहीं, 500 लोगों को नौकरी देने वाली कंपनी के मामले में यह सहायता बढ़कर 70 प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि, ये प्रस्तावित उदाहरण हैं और अंतिम नियमों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही वास्तविक पात्रता और सहायता की शर्तें स्पष्ट होंगी।
महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए रोजगार के नए अवसर
नई नीति में महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र में इन वर्गों की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना है। इस दिशा में विशेष प्रोत्साहन का प्रस्ताव राज्य की रोजगार नीति को अधिक समावेशी बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
पिछड़े जिलों में उद्योग लगाने पर मिल सकते हैं अतिरिक्त लाभ
सरकार की योजना केवल कोलकाता और उसके आसपास औद्योगिक निवेश बढ़ाने तक सीमित नहीं है। पुरुलिया, झाड़ग्राम, बांकुड़ा, कूचबिहार तथा उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में उद्योग लगाने वाले निवेशकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। इससे इन इलाकों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
बिजली शुल्क और बुनियादी सुविधाओं में भी राहत की तैयारी
EPF सहायता के अलावा औद्योगिक इकाइयों को बिजली शुल्क में छूट देने और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में सहयोग देने की योजना भी प्रस्तावित है। अधिक रोजगार पैदा करने वाली और पिछड़े क्षेत्रों में स्थापित होने वाली इकाइयों को बिजली शुल्क में ज्यादा राहत मिल सकती है।
इसके अलावा, निवेशकों को वन विभाग और अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करने जैसी प्रक्रियाओं में आने वाली परेशानियों को कम करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए सिंगल विंडो व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है।
5 नवंबर को नई औद्योगिक नीति की औपचारिक घोषणा
पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने 28 अक्टूबर को नई औद्योगिक नीति के मसौदे को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 5 नवंबर को राज्य सचिवालय नबान्न से इस नीति की औपचारिक घोषणा करने वाले हैं। सरकार का लक्ष्य निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना, प्रशासनिक बाधाओं को कम करना और राज्य में औद्योगिक विकास को गति देना है।