कोलकाता: पश्चिम बंगाल को विश्व पर्यटन के नक्शे पर एक नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने शुक्रवार को कोलकाता के धनधान्य प्रेक्षागृह में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने "देखबो नतून रूपे, देखबो नतून चोखे" (देखेंगे नए रूप में, देखेंगे नई नजर से) के नए स्लोगन के साथ राज्य पर्यटन विभाग के नए लोगो और ब्रांडिंग का आधिकारिक अनावरण किया। कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री शंकर घोष, उद्योग मंत्री तापस रॉय, सूचना एवं संस्कृति राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती और राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पर्यटन ढांचे के कायाकल्प के लिए 500 करोड़ का बजट
राज्य में पर्यटन क्षेत्र को गति देने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 500 करोड़ रुपये के बजट आवंटन की घोषणा की। उन्होंने पुरानी नीतियों पर अफसोस जताते हुए कहा, "एक समय 'डेस्टिनेशन पश्चिम बंगाल' का नाम हुआ करता था, लेकिन बाद में पर्यटन की अपार संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया गया। पर्यटक हमारे राज्य के रास्ते सिक्किम चले जाते हैं, लेकिन अब इस स्थिति को बदलने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।" उन्होंने सुंदरबन से लेकर दार्जिलिंग तक फैले सभी सरकारी टूरिस्ट गेस्ट हाउसों के त्वरित आधुनिकीकरण का निर्देश दिया।

कोलकाता में बनेगी 17वीं 'वाटर मेट्रो', मंदरमणि का गोवा की तर्ज पर विकास
नदी मार्गों का उपयोग कर व्यावसायिक व पर्यटन परिवहन में बदलाव लाने के लिए कोलकाता को देश के 17वें 'वाटर मेट्रो' प्रोजेक्ट से जोड़ने का अंतिम निर्णय लिया गया है। इसके तहत नदियों में पर्यटकों की आवाजाही के लिए आधुनिक बोट्स उतारी जाएंगी। इसके साथ ही ऐतिहासिक मंदरमणि समुद्र तट को गोवा की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।
20 लाख मैंग्रोव और बक्सा में बाघ छोड़ने का ऐलान
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सुंदरबन के प्राकृतिक संतुलन को बहाल करने के लिए इस साल 20 लाख मैंग्रोव के पौधे लगाए जाएंगे और 'डेस्टिनेशन सुंदरबन' के रूप में इसे निधारा जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने घोषणा की कि आगामी 2 अक्टूबर को वन विभाग की ओर से उत्तर बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में आधिकारिक रूप से बाघ छोड़े जाएंगे।
12 विशेष त्यौहारों पर पारंपरिक पोशाक पहनेंगे कर्मचारी
बंगाल की संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने 12 विशेष दिनों की पहचान की है, जिन दिनों विभाग के सभी कर्मचारी और अधिकारी पारंपरिक बंगाली पोशाक पहनकर कार्यालय आएंगे। यदि कोई निर्धारित दिन छुट्टी का होता है, तो उससे ठीक पहले वाले कार्यदिवस पर पारंपरिक पोशाक पहनी जाएगी। इन 12 दिनों में सरस्वती पूजा, डोली (होली), बुद्ध पूर्णिमा, पोयला बैशाख, जमाई षष्ठी, रथ यात्रा, राखी पूर्णिमा, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा की अष्टमी, काली पूजा, भाई दूज और पौष संक्रांति शामिल हैं।