रायपुर: नियमित, अनियमित कर्मचारियों और पेंशनरों की विभिन्न मांगों को लेकर 11 सितंबर को नया रायपुर स्थित इंद्रावती भवन के गेट नंबर-3 के सामने संयुक्त प्रदर्शन किया जाएगा। भोजनावकाश के समय होने वाले इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी, अनियमित कर्मचारी और पेंशनर संघों के वर्तमान एवं पूर्व प्रांताध्यक्ष शामिल होंगे। प्रदर्शन के जरिए सरकार का ध्यान पांच प्रमुख मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
‘एक मांग-एक मंच’ अभियान को मिला व्यापक समर्थन
छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले शुरू किए गए ‘एक मांग-एक मंच’ अभियान को अब कर्मचारी संगठनों का व्यापक समर्थन मिलने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के प्रति आर्थिक रूप से लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रही है।
अटेरिया के मुताबिक कर्मचारियों को नियत समय पर महंगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा है। वहीं, हर साल कई महीनों के महंगाई भत्ता एरियर्स का भुगतान भी लंबित रहता है। उन्होंने इसे वित्त विभाग की अघोषित नीति बताया।
देय तिथि से महंगाई भत्ता देने की मांग
करन सिंह अटेरिया ने कहा कि 13 सितंबर 2025 को वित्त मंत्री के समक्ष कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल की चर्चा हुई थी। उस दौरान वर्ष 2026 से केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद कर्मचारियों और फैमिली पेंशनरों को देय तिथि से पेंशन व महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ न्याय होना चाहिए तथा उन्हें समय पर उनके आर्थिक लाभ दिए जाने चाहिए।
अनियमित कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग उठाई
अनियमित कर्मचारियों की स्थिति पर गोपाल प्रसाद साहू ने कहा कि प्रदेश के अनियमित कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण सहित विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हड़ताल के दौरान संविदा कर्मचारियों के साथ जिन समझौतों की बात हुई थी, हड़ताल समाप्त होने के बाद उन पर अमल नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में ठेका पद्धति लागू किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति और बेरोजगार युवाओं के हित प्रभावित हो रहे हैं।
वित्त मंत्री और अधिकारियों से चर्चा के बाद भी नहीं निकला समाधान
कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और वित्त सचिव से मुलाकात कर अपनी मांगों को लेकर चर्चा की, लेकिन किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने 11 सितंबर को संयुक्त प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार का ध्यान कर्मचारियों, अनियमित कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना है।
ये हैं कर्मचारियों-पेंशनरों की 5 प्रमुख मांगें
1. अनियमित कर्मचारियों से जुड़ी मांगें:
अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यून मानदेय पाने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जाए तथा आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था के माध्यम से नियोजन की प्रक्रिया बंद की जाए।
2. नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन:
नगरीय निकाय के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की गई है।
3. स्वास्थ्य विभाग में ठेका पद्धति बंद करने की मांग:
स्वास्थ्य विभाग में लागू ठेका पद्धति को पूरी तरह समाप्त करने की मांग कर्मचारी संगठनों ने उठाई है।
4. कैशलेस उपचार की सुविधा:
नियमित कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए मध्य प्रदेश की तर्ज पर 20 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा का आदेश तत्काल जारी करने की मांग है।
5. महंगाई भत्ता और एरियर्स का भुगतान:
जनवरी 2026 से कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता देने का आदेश जारी करने तथा लंबित 86 महीनों के महंगाई भत्ता एरियर्स की राशि का भुगतान करने की मांग की गई है।
11 सितंबर को शक्ति प्रदर्शन
कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 11 सितंबर को भोजनावकाश के दौरान इंद्रावती भवन के गेट नंबर-3 के सामने संयुक्त प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन में नियमित-अनियमित कर्मचारियों और पेंशनर संगठनों की भागीदारी रहेगी। संगठनों का कहना है कि यदि मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।