मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शुक्रवार, 9 जनवरी को प्रातः 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा 19वां डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रख्यात पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल को प्रदान किया जाएगा। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा आयोजित यह त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम 9 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश की सशक्त भूमिका
यह राष्ट्रीय आयोजन भारत के विरासत एवं ज्ञान परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्थापित हो रहा है। इसमें देशभर से प्रख्यात विद्वान, वरिष्ठ प्रशासक, नीति-निर्माता, शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं विरासत क्षेत्र के विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं। यह आयोजन धरोहर प्रशासन, अंतर्विषयक अनुसंधान तथा वैज्ञानिक संरक्षण पद्धतियों के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की सशक्त होती भूमिका को रेखांकित करता है।
डॉ. यशोधर मठपाल को मिलेगा सम्मान
डॉ. यशोधर मठपाल को यह सम्मान पुरातत्व एवं शैल-चित्र अध्ययन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय और दीर्घकालिक योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है। वे वरिष्ठ पुरातत्वविद्, चित्रकार, क्यूरेटर एवं शैल-चित्र संरक्षण विशेषज्ञ हैं। उन्होंने पश्चिमी घाट, हिमालय, विंध्य एवं कैमूर पर्वत श्रेणियों में 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं की खोज की है। शैल-चित्र संरक्षण की वैज्ञानिक विधियों के विकास में उनके योगदान ने भारत की प्रागैतिहासिक विरासत के अध्ययन एवं संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
अनेक ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे
राष्ट्रीय संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विचारकों एवं विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, सत्र अध्यक्षता तथा मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। प्रमुख वक्ताओं में कल्याण कुमार चक्रवर्ती (आईएएस), प्रो. रवि कोरिसेट्टर,अरुण सिंघल (सेवानिवृत्त आईएएस), हरसहाय मीणा (आईएएस), प्रो. आलोक त्रिपाठी, डॉ. नंदिनी भट्टाचार्य साहू, डॉ. ए.के. सिन्हा तथा डॉ. डी. दयालन सहित अनेक ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय अभिलेखागार एवं विभिन्न राज्य अभिलेखागारों से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञ सत्रों को शैक्षणिक गहराई एवं नीतिगत प्रासंगिकता प्रदान करेंगे।
संगोष्ठी के अंतर्गत तीन प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित विमर्श किया जाएगा—
- पुरातत्व, नृवंश-पुरातत्व, पुरातत्वमिति, कलाकृति विश्लेषण एवं सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन में नवीन उपलब्धियाँ।
- अभिलेखागार एवं दस्तावेज प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ, विशेष रूप से हाइब्रिड प्रणालियाँ।
- मूर्त एवं अमूर्त विरासत के संग्रहण, भंडारण, उपलब्धता एवं संरक्षण में नवीनतम विकास, जिसमें डिजिटल क्यूरेशन पर विशेष फोकस रहेगा।
कार्यक्रम में शोध-पत्र प्रस्तुतियाँ, विचार-विमर्श तथा साक्ष्य-आधारित अनुशंसाएँ तैयार करने की प्रक्रिया भी शामिल है।
शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ आयोजन में विशेष प्रदर्शनियाँ, वृत्तचित्र प्रदर्शन तथा भोपाल एवं आसपास के प्रमुख विरासत स्थलों के लिए निर्देशित भ्रमण भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों को क्षेत्र की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।
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