मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर ठगों ने 89 वर्षीय सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी नारायण महादेव टिकेकर से 2 करोड़ 52 लाख 16 हजार रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और 28 जनवरी से 20 फरवरी तक कथित जांच के नाम पर ऑनलाइन निगरानी में रखा।
फर्जी कोर्ट रूम और सीबीआई अधिकारी का झांसा
पीड़ित के अनुसार, 28 जनवरी को व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया, जिसमें स्क्रीन पर कथित कोर्ट रूम दिखाया गया। जज, वकील और पुलिस अधिकारी जैसे किरदार नजर आ रहे थे। कॉल करने वाले ने खुद को “विजय खन्ना” बताकर मुंबई का सीबीआई अधिकारी बताया। ठग ने आरोप लगाया कि उनके नाम से केनरा बैंक में खुलवाए गए खाते में मनी लॉन्ड्रिंग के 20 लाख रुपये आए हैं। फोन पर ही पूछताछ की जाएगी और सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई होगी।
पांच किस्तों में ट्रांसफर कराए करोड़ों रुपये
डर और कानूनी कार्रवाई के भय से बुजुर्ग दंपती ठगों के झांसे में आ गए। ठगों ने संपत्ति, बैंक खातों और म्यूचुअल फंड की जानकारी लेकर ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर पांच अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 2.52 करोड़ रुपये अपने बताए खातों में ट्रांसफर करा लिए।
बैंक मैनेजर ने खोली ठगी की पोल
जब पीड़ित बैंक पहुंचे और ठगों द्वारा भेजी गई एनओसी दिखाई, तो बैंक मैनेजर ने दस्तावेज को फर्जी बताया। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। ग्वालियर क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी वारदात
गौरतलब है कि मार्च 2025 में ग्वालियर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव को भी डिजिटल अरेस्ट कर करीब 2.52 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
साइबर अपराधी वीडियो कॉल के जरिए खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते हैं। वे पीड़ित को घर में ही ऑनलाइन निगरानी में रखते हैं और जांच या वेरिफिकेशन के नाम पर बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।
ऐसे रहें सावधान
- किसी भी वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें।
- किसी भी जांच एजेंसी द्वारा ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं दिया जाता।
- संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
- निजी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या निवेश विवरण साझा न करें।
- ग्वालियर की यह घटना एक बार फिर बताती है कि साइबर ठग अब बुजुर्गों को निशाना बनाकर अत्याधुनिक तरीकों से वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
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