आयोग ने लोक शिक्षण संचालनालय, सभी जिला कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्कूल परिसरों में होने वाले छात्र-आयोजित कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट और सख्त नियम बनाए जाएं। यदि कोई कार्यक्रम विद्यार्थियों की पहल पर आयोजित किया जाता है, तो इसकी पूर्व जानकारी स्कूल प्रबंधन को देना अनिवार्य होगा। साथ ही, ऐसे आयोजन शिक्षकों की देखरेख में और तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही आयोजित किए जाएं।
आयोग का कहना है कि किशोरावस्था में उत्साह और रोमांच की भावना सामान्य है, लेकिन यह किसी भी स्थिति में बच्चों की सुरक्षा से समझौता करने का कारण नहीं बन सकती। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो ऐसी गतिविधियां गलत परंपरा का रूप ले सकती हैं, जिससे भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्कूल में स्टंट या अन्य अनुचित गतिविधि की शिकायत मिलती है, तो संबंधित संस्था प्रमुख से जवाब तलब किया जाए और उन्हें चेतावनी दी जाए। जरूरत पड़ने पर पुलिस अधिकारियों को भी स्कूलों में भेजकर विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
आयोग ने संबंधित विभागों से अपेक्षा की है कि इन सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की विस्तृत लिखित रिपोर्ट 20 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों में होने वाले सभी आयोजन सुरक्षित, अनुशासित और गरिमापूर्ण माहौल में संपन्न हों।
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