उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग लगने की घटनाओं ने हर किसी को हैरान कर रखा है। जानकारी के मुताबिक, अब तक इस आग की चपेट में आने से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। आग पर काबू पाने के लिए भारती वायुसेना की भी मदद ली जा रही है। बीते साल एक नवंबर से अब तक प्रदेश में जंगल में आग की 910 घटनाएं हुईं हैं जिनसे करीब 1145 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है। देवभूमि कहे जाने वाले राज्य उत्तराखंड के इन हालात ने हर किसी को हैरान कर दिया है। लेकिन इस आग का कारण क्या है? क्या ये आग मानव निर्मित है? इस आग को रोकने में समस्या कहां आ रही है?
क्या है जंगलों में आग लगने का कारण?
उत्तराखंड में जंगलों के क्षेत्रफल की बात करें तो राज्य के 44.5 फीसदी क्षेत्रफल में जंगल मौजूद हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य का वन क्षेत्र 24,305 वर्ग किमी है। हिमालयी क्षेत्र में लंबे समय तक शुष्क मौसम और अतिरिक्त बायोमास आग की घटना में योगदान देते हैं। प्राकृतिक कारणों की बात करें तो सूखे पेड़ों या बांस के रगड़ खाने या फिर पत्थरों से निकली चिंगारी और बिजली गिरने के कारण भी जंगल में आग लगने की घटना देखी जाती है। इसके अलावा राज्य में मुख्य रूप से 3.94 लाख हेक्टेयर में फैले अत्यधिक ज्वलनशील चीड़ के पेड़ भी हैं।
उत्तराखंड के जंगलों में बीते कुछ समय से आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। इस आग के कारण अब तक कुल 5 लोगों की जान चली गई है। वहीं, इस आग को बढ़ावा देने के आरोप में पुलिस ने केस दर्ज कर के कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है।