भारत ने स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ यानी 2047 तक खुद को विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस दिशा में अर्थव्यवस्था की तेज वृद्धि को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। भारत दुनिया की प्रमुख बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और हाल की तिमाही में वृद्धि दर 7% से ऊपर रहने का अनुमान जताया गया है। यह दर वैश्विक परिस्थितियों के बीच मजबूत प्रदर्शन का संकेत देती है, लेकिन लंबी अवधि के लक्ष्य को देखते हुए विशेषज्ञ इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। वजह यह है कि विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए केवल वर्तमान आकार की अर्थव्यवस्था को बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, उत्पादकता, रोजगार और तकनीकी क्षमता में भी लगातार तेज सुधार करना होगा।
वित्त मंत्री ने भी तेज प्रयासों पर दिया जोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को लेकर कहा कि देश के पास इस महत्वाकांक्षी उद्देश्य को हासिल करने के लिए अब सीमित समय बचा है। उन्होंने इस लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अधिक प्रतिभाशाली लोगों, विशेषज्ञों और विचारों की जरूरत पर जोर दिया। सरकार की ओर से लगातार बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और कौशल विकास को गति देने पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन प्रयासों के साथ ऐसी वृद्धि दर बनाए रखना भी जरूरी होगा जो अगले 2 दशकों तक लगातार उच्च स्तर पर बनी रहे। किसी एक या कुछ वर्षों में तेज वृद्धि हासिल करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन इतने लंबे समय तक उच्च वृद्धि बनाए रखना कहीं अधिक कठिन चुनौती है।
7% की वृद्धि मजबूत है, लेकिन लक्ष्य के लिए पर्याप्त नहीं
7% के आसपास की वार्षिक आर्थिक वृद्धि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत प्रदर्शन मानी जाती है, खासकर तब जब अर्थव्यवस्था का आकार पहले ही काफी बड़ा हो चुका हो। लेकिन भारत के 2047 के लक्ष्य का पैमाना सामान्य आर्थिक विस्तार से कहीं बड़ा है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि भारत को अगले 2 दशकों में उच्च आय वाली विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करना है तो उसे लगातार 8% से ऊपर और बेहतर स्थिति में 9% से अधिक की वृद्धि बनाए रखने की आवश्यकता हो सकती है। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ता है, उसी प्रतिशत की वृद्धि हासिल करने के लिए हर वर्ष पहले से कहीं अधिक वास्तविक आर्थिक गतिविधि पैदा करनी पड़ती है। इसलिए आज की 7% वृद्धि को अगले 20 वर्षों तक जस का तस बनाए रखना अपने आप में पर्याप्त उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि वृद्धि की गुणवत्ता और उत्पादकता को भी लगातार ऊंचा उठाना होगा।
9.25% की दर को बताया गया महत्वपूर्ण स्तर
नीति आयोग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह आकलन सामने आया है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को लंबे समय तक 9% से अधिक की आर्थिक वृद्धि की जरूरत पड़ सकती है। अनुमान के मुताबिक यदि अगले करीब 21 वर्षों तक अर्थव्यवस्था औसतन 9.25% की दर से बढ़ती है, तो भारत के लिए इस लक्ष्य तक पहुंचने की संभावना काफी मजबूत हो सकती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद ने भी इसी तरह के आकलन का उल्लेख किया है। हालांकि, उनके मुताबिक अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने के साथ इस तरह की उच्च वृद्धि दर को लगातार बनाए रखना और मुश्किल होता जाएगा। यही कारण है कि भारत के सामने केवल उच्च वृद्धि हासिल करने की नहीं, बल्कि उसकी गति को लंबे समय तक बनाए रखने की चुनौती भी है।
मिडिल इनकम ट्रैप का खतरा क्यों अहम है
अर्थशास्त्रियों की चिंता केवल वृद्धि दर के एक आंकड़े तक सीमित नहीं है। यदि भारत लंबे समय तक 8% से कम की गति से बढ़ता है, तो उसके सामने तथाकथित मिडिल इनकम ट्रैप का जोखिम बढ़ सकता है। इस स्थिति में किसी देश की आय और मजदूरी तो बढ़ती हैं, लेकिन उत्पादकता, तकनीकी क्षमता, औद्योगिक दक्षता और उच्च मूल्य वाले उत्पादन में उसी अनुपात में सुधार नहीं हो पाता। नतीजतन अर्थव्यवस्था मध्यम आय के स्तर पर लंबे समय तक अटक सकती है और विकसित देशों तक पहुंचने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। भारत के लिए यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले वर्षों में बड़ी युवा आबादी के लिए पर्याप्त उत्पादक रोजगार पैदा करना और प्रति व्यक्ति आय में तेज वृद्धि सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
सिर्फ वृद्धि दर नहीं, उसकी गुणवत्ता भी जरूरी
2047 तक विकसित भारत बनने के लिए केवल जीडीपी का आंकड़ा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उच्च वृद्धि को रोजगार सृजन, विनिर्माण क्षमता, निर्यात, निजी निवेश, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी नवाचार में ठोस सुधार से जोड़ना होगा। कृषि से उद्योग और सेवाओं की ओर श्रम के अधिक उत्पादक स्थानांतरण के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ना भी महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ाना और मानव पूंजी में निवेश करना आर्थिक वृद्धि की संभावित गति को और मजबूत कर सकता है। यदि इन क्षेत्रों में सुधार व्यापक स्तर पर होता है तो ऊंची वृद्धि दर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोगों की आय और जीवन स्तर में भी दिखाई देगी।
अगले 20 वर्षों में असली परीक्षा रफ्तार बनाए रखने की
भारत के सामने 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए समय सीमित है और चुनौती बड़ी है। 7% की वृद्धि दर मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में प्रभावशाली जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए इससे अधिक तेज और लगातार वृद्धि की आवश्यकता होगी। लगभग 9% या उससे अधिक की गति को कई वर्षों तक बनाए रखने के लिए निवेश, उत्पादकता, तकनीक, कौशल और रोजगार के मोर्चे पर समानांतर सुधार जरूरी होंगे। जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ेगा, उच्च वृद्धि हासिल करना स्वाभाविक रूप से कठिन होता जाएगा। इसलिए विकसित भारत 2047 की असली परीक्षा केवल यह नहीं होगी कि भारत कितनी तेजी से बढ़ता है, बल्कि यह होगी कि वह कितने लंबे समय तक तेज, समावेशी और उत्पादक आर्थिक विकास की रफ्तार कायम रख पाता है।