इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता ने वैश्विक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित यह बातचीत मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में निर्णायक साबित हो सकती है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के आगमन से पहले शहर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और प्रशासन ने एहतियातन दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।
14 दिन के युद्धविराम के बाद पहली बड़ी पहल
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में घोषित 14 दिन के अस्थायी युद्धविराम ने फिलहाल सीधे टकराव को रोका है। हालांकि, लेबनान में जारी इजरायली हमलों और युद्धविराम की शर्तों को लेकर असहमति इस बातचीत पर दबाव बना सकती है। ऐसे में यह बैठक शांति प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है।
कौन-कौन होंगे शामिल?
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी मौजूद रहेंगे। रवाना होने से पहले वेंस ने बातचीत को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई है।
वहीं, ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे “निर्णायक क्षण” बताते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है।
क्या होंगे बातचीत के मुख्य मुद्दे?
इस बैठक का सबसे अहम एजेंडा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना उनकी प्राथमिकता है।
हालांकि, दोनों पक्षों के प्रस्तावों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जहां अमेरिका ईरान की परमाणु और रक्षा क्षमताओं पर सख्त नियंत्रण चाहता है, वहीं ईरान सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी शर्तों को मान्यता देने की मांग कर रहा है।
लेबनान बना सबसे बड़ा अड़ंगा
इस वार्ता में लेबनान का मुद्दा सबसे बड़ा विवाद बनकर उभर रहा है। ईरान का कहना है कि युद्धविराम में उसके सहयोगी हिजबुल्लाह को भी शामिल किया जाना चाहिए, जबकि अमेरिका और इजरायल इस बात से सहमत नहीं हैं।
हाल ही में लेबनान में हुए इजरायली हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। ईरानी पक्ष ने साफ संकेत दिया है कि लेबनान में शांति के बिना आगे की बातचीत मुश्किल हो सकती है।
क्या वेंस निभा पाएंगे अहम भूमिका?
इस पूरे घटनाक्रम में जेडी वेंस की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। उन्हें ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच संवाद का पुल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वेंस ने भी माना है कि लेबनान को लेकर “गलतफहमी” की स्थिति बनी हुई है और इसे सुलझाना जरूरी होगा। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह वार्ता स्थायी शांति की दिशा में कदम साबित होगी या फिर मध्य पूर्व में तनाव और गहराएगा।