अप्रैल में ईरान की ओर से दागी गई कंधे से चलाने वाली मिसाइल ने करीब 30 मिलियन डॉलर कीमत वाले 2-सीटर F-15E लड़ाकू विमान को निशाना बनाया। विमान पर हमला इतना जबरदस्त था कि अमेरिकी वायुसेना के कर्नल ड्यूड 44 ब्रावो ने इसे मालगाड़ी से टकराने जैसा झटका बताया। विमान को बचाने की तमाम कोशिशों के बाद जब यह स्पष्ट हो गया कि उसे संभालना संभव नहीं है, तो पायलट अल्फा और ब्रावो को विमान से बाहर निकलना पड़ा। दोनों ने ईजेक्शन किया और ईरान के रेगिस्तानी पहाड़ी इलाके में जा गिरे। इसके बाद दोनों अमेरिकी सैनिकों के सामने अलग-अलग परिस्थितियों में जीवित बचने और दुश्मन के इलाके से निकलने की चुनौती थी।
पैराशूट ने दिया धोखा, 70-100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गिरे
ब्रावो के लिए संकट उस समय और भयावह हो गया, जब उन्हें पता चला कि उनका पैराशूट ठीक से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने ऊपर देखा तो पैराशूट दिखाई ही नहीं दिया और उन्हें समझ आ गया कि वह लगभग सीधे जमीन की ओर गिर रहे हैं। अनुमान के मुताबिक उनकी गिरने की गति 70-100 मील प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। जमीन से टकराने के बाद उनकी रीढ़ की हड्डी, एक हाथ और कंधे में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने बताया कि उस क्षण पैराशूट का न खुलना उनके जीवन का सबसे भयावह अनुभव था। उसी समय उन्होंने प्रार्थना की कि यदि उन्हें इस संकट से निकलना है तो उन्हें सहायता मिले। गंभीर चोटों और असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने खुद को निष्क्रिय नहीं होने दिया।
घायल शरीर लेकर पहाड़ की ओर बढ़े
जमीन पर गिरने के तुरंत बाद ब्रावो ने अपनी स्थिति को समझा और लैंडिंग स्थल से दूर जाने का फैसला किया। उन्हें मालूम था कि खुले इलाके में पड़े रहना उनके लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और ईरानी सुरक्षा बल उन्हें आसानी से तलाश सकते हैं। ऊंची घाटियों और खुरदरी चट्टानों से घिरे उस क्षेत्र में उन्होंने अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान के लिए ऊपर की दिशा पकड़ी। गंभीर चोटों के बावजूद वह करीब 7,000 फीट ऊंची पर्वत-रेखा तक पहुंचे और वहां चढ़ाई की। उनकी यह कोशिश केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि दुश्मन के इलाके में जीवित रहने की रणनीति भी थी। ब्रावो ने अपने अनुभव को बेहद संक्षिप्त लेकिन तीखे अंदाज में बताते हुए कहा कि प्रेरणा की कमी आपको ईरानी टेलीविजन तक पहुंचा सकती है।
अल्फा को दिन में बचाया गया, ब्रावो रह गए पीछे
विमान से निकलने के बाद दोनों अमेरिकी अधिकारियों की राह अलग हो गई। अल्फा को अमेरिकी बलों ने एक जोखिम भरे दिन के अभियान में निकाल लिया। इस अभियान के दौरान अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच गोलीबारी भी हुई, जिससे बचाव अभियान का खतरा कई गुना बढ़ गया। हालांकि, उस समय ब्रावो तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया। उन्हें दुश्मन के इलाके में अकेले ही रात बितानी पड़ी और अपनी गंभीर चोटों के साथ अगले अवसर की प्रतीक्षा करनी पड़ी। इस दौरान उनका सबसे बड़ा सहारा उनका प्रशिक्षण, परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता और यह समझ थी कि किसी भी कीमत पर उन्हें अपनी स्थिति छिपाकर रखनी है। अमेरिकी बलों के लिए भी उन्हें खोज निकालना आसान नहीं था, क्योंकि वह ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी और रेगिस्तानी भूभाग में छिपे हुए थे।
रात के अंधेरे में भेजा जीवन का संदेश
ईरान में पहली रात ढलने के बाद ब्रावो को अपने हालात पर विचार करने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने घर तक यह संदेश पहुंचाने में सफलता हासिल की कि वह जीवित हैं। उनका संदेश था, “ईश्वर महान है।” उन्होंने बताया कि यह केवल जीवित होने की सूचना नहीं थी, बल्कि उन तमाम घटनाओं के प्रति उनकी प्रतिक्रिया थी, जिनसे गुजरकर वह उस मुकाम तक पहुंचे थे। वह गंभीर रूप से घायल थे, दुश्मन के इलाके में थे और उनके साथी को बचाकर निकाला जा चुका था, लेकिन फिर भी उन्होंने यह संकेत दिया कि वह उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं। इसके साथ उन्होंने अमेरिकी सेना को यह भी सूचित करने में सफलता हासिल की कि वह घायल हैं, लेकिन अभी चल-फिर पा रहे हैं। इस संदेश ने बचाव दल को उनकी स्थिति और जीवित होने की पुष्टि दी।
इस्फहान के दक्षिण में जारी था युद्ध अभियान
ब्रावो के अनुसार, ईरान में बिताई गई अगली रात भी युद्ध के बीच गुजरी। वह इस्फहान शहर के दक्षिण में स्थित एक पर्वतीय क्षेत्र के निकट एक हमले की तैयारी में थे। यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील माना जाता था, क्योंकि इसी व्यापक क्षेत्र के आसपास ईरान ने अपने अत्यधिक समृद्ध परमाणु पदार्थ का महत्वपूर्ण भंडार रखा हुआ था। ऐसे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियान का हिस्सा होना पहले से ही अत्यधिक जोखिम भरा था, लेकिन विमान गिरने के बाद ब्रावो के सामने स्थिति पूरी तरह बदल गई। अब वह एक लड़ाकू विमान के चालक दल के सदस्य भर नहीं थे, बल्कि दुश्मन की धरती पर घायल अवस्था में जीवित रहने की कोशिश कर रहे एक सैनिक थे। उनके अनुभव ने युद्धक्षेत्र में पायलटों के प्रशिक्षण, आपातकालीन निर्णय क्षमता और बचाव अभियानों की जटिलता को भी सामने ला दिया।
प्रशिक्षण, धैर्य और उम्मीद ने बचाए रखा
ब्रावो की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने मानसिक नियंत्रण नहीं खोया। पैराशूट की विफलता, तेज गति से जमीन पर गिरना, रीढ़ और हाथ में चोट, दुश्मन का इलाका तथा साथी से अलगाव—इन सभी परिस्थितियों के बीच उन्होंने तत्काल निर्णय लिए और लगातार अपनी स्थिति बदलते रहे। उनका यह व्यवहार अमेरिकी वायुसेना के उस प्रशिक्षण को भी दर्शाता है जिसमें सैनिकों को प्रतिकूल परिस्थितियों में उपलब्ध संसाधनों के साथ जीवित रहने और बचाव दल तक पहुंचने तक संघर्ष करने के लिए तैयार किया जाता है। 2 दिनों तक दुश्मन के इलाके में रहने के बाद उनका बचाया जाना केवल एक सैन्य अभियान की सफलता नहीं था, बल्कि असाधारण शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता की कहानी भी बन गया। ब्रावो के लिए प्रार्थना और प्रशिक्षण, दोनों ने उस कठिन दौर में अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।