जिनेवा। World Health Organization ने अफ्रीकी देशों Democratic Republic of the Congo और Uganda में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को लेकर अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दी है। यह संक्रमण ईबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जिसे बेहद खतरनाक माना जा रहा है। स्वास्थ्य एजेंसियों के मुताबिक इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई विशेष वैक्सीन या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
बुंडीबुग्यो स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहली बार साल 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में सामने आया था। उस समय भी इस वायरस ने बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित किया था। अब एक बार फिर यह वायरस अफ्रीका के कई इलाकों में तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह स्ट्रेन पहले फैले ज़ैरे स्ट्रेन से अलग है। हालांकि इसकी मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, लेकिन फिर भी यह बेहद जानलेवा साबित हो सकता है।
ईबोला के कई स्ट्रेन, लेकिन खतरा बरकरार
विशेषज्ञों के मुताबिक ईबोला वायरस के कई प्रकार हैं, जिनमें ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो स्ट्रेन सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं। ज़ैरे स्ट्रेन में मृत्यु दर 90 प्रतिशत तक देखी गई है, जबकि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में भी कई मामलों में 40 प्रतिशत तक मौतें दर्ज हुई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की उम्र, इलाज की उपलब्धता और संक्रमण की गंभीरता के आधार पर स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो सकती है।
जंगलों और जंगली जानवरों से फैलता है वायरस
रिपोर्ट्स के मुताबिक कांगो के घने जंगलों में यह वायरस प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चमगादड़ और कुछ जंगली जानवर इसके मुख्य स्रोत हो सकते हैं। संक्रमित जानवरों या इंसानों के संपर्क में आने से यह वायरस तेजी से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, लार, पसीने और शरीर के अन्य तरल पदार्थों से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
फ्लू जैसे लक्षणों से होती है शुरुआत
ईबोला संक्रमण की शुरुआत सामान्य फ्लू जैसे लक्षणों से होती है। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, शरीर दर्द और थकान महसूस होती है। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में खराश की शिकायत बढ़ने लगती है। गंभीर स्थिति में शरीर के विभिन्न हिस्सों से खून बहने लगता है और कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण के लक्षण 2 से 21 दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं।
इलाज नहीं, केवल निगरानी और देखभाल सहारा
बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीजों को आइसोलेट कर केवल सपोर्टिव ट्रीटमेंट दे रहे हैं। इलाज के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी की जाती है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सपोर्ट और ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी दिया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से मरीज के बचने की संभावना बढ़ सकती है।
WHO ने बढ़ाई निगरानी और सतर्कता
WHO और स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी पर जोर दे रही हैं। सीमा क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान भी तेज किए गए हैं। संगठन ने कहा है कि फिलहाल इसे वैश्विक महामारी नहीं माना गया है, लेकिन पड़ोसी देशों को पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।