भोपाल। मध्यप्रदेश में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से कई शहरों की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। भोपाल में लगातार दूसरे दिन कचरा नहीं उठा। सड़कों और बाजारों में कचरे के ढेर लग गए हैं। कई जगह लोग कचरा जलाने को मजबूर हैं। वहीं, कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है। इससे राजधानी के 2.30 लाख से ज्यादा नल कनेक्शन प्रभावित होने का खतरा है। सफाई कर्मचारियों के साथ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। गुरुवार को कर्मचारी नेता ने नगर निगम मुख्यालय अटल भवन की बिजली सप्लाई बंद कर ताला लगा दिया।
भोपाल के 85 वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित
भोपाल में करीब 11 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इनमें सफाईकर्मियों के अलावा कम्प्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर, विद्युत, उद्यान, अतिक्रमण और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। हड़ताल के कारण शहर के सभी 85 वार्डों और 21 जोन में काम प्रभावित हुआ है। घरों से कचरा उठाने वाली 400 से ज्यादा गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं। सामान्य दिनों में ये गाड़ियां रोज दो से तीन चक्कर लगाती हैं। भोपाल से प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है।
लिंक रोड से एमपी नगर तक कचरे के ढेर
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर शहर के प्रमुख इलाकों में दिखाई दे रहा है। लिंक रोड नंबर-1 पर पेट्रोल पंप के सामने डस्टबिन का कचरा सड़क पर फैल गया है। 5 नंबर स्टॉप और 7 नंबर स्थित एमपी नगर एसडीएम कार्यालय के सामने भी कचरे के ढेर लगे हैं। शिवाजी नगर और तुलसी नगर में भी दो दिन से कचरा कलेक्शन गाड़ियां नहीं पहुंची हैं। चूना भट्टी सहित कुछ इलाकों में लोगों और व्यापारियों ने जमा कचरे में आग लगा दी। इससे प्रदूषण बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।
नगर निगम मुख्यालय की बिजली काटी, अटल भवन में ताला लगाया
सफाई कर्मचारियों के साथ अब दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन की बिजली सप्लाई बंद कर दी और वहां ताला लगा दिया। अशोक वर्मा ने चेतावनी दी कि जब तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक शहर की दीपावली अंधेरे में रहेगी। कर्मचारी नेताओं ने शुक्रवार को नगर निगम में पूरी तरह तालाबंदी करने की भी चेतावनी दी है।
अधिकारियों से बातचीत बेनतीजा, व्यापारियों ने संभाली सफाई
हड़ताल खत्म कराने के लिए यूनियन पदाधिकारियों ने नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे से मुलाकात की, लेकिन बातचीत में कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद कर्मचारियों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। इससे पहले न्यू मार्केट सहित कई बाजारों में व्यापारियों ने स्वयंसेवकों की मदद से सफाई कराई। व्यापारियों ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की।
सिरोंज में विधायक ने लगाई झाड़ू, खिलचीपुर में टेलर ने की सफाई
हड़ताल के बीच विदिशा जिले के सिरोंज में विधायक उमाकांत शर्मा खुद सड़क पर सफाई करने उतरे। उन्होंने बुधवार रात करीब दो घंटे तक झाड़ू लगाकर सफाई की। वहीं, राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में कपड़े सिलने की दुकान चलाने वाले दिनेश कुमार नामदेव उर्फ पप्पू ने गुरुवार सुबह बाजार की सफाई की। वे झाड़ू और हाथ ठेला लेकर सुभाष चौक से सर्राफा बाजार तक पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक कचरा इकट्ठा कर शहर से बाहर पहुंचाया। दिनेश का कहना है कि दीपावली पर बाजार में बाहर से भी लोग आते हैं। बाजार में गंदगी देखकर लोगों पर अच्छा असर नहीं पड़ेगा। उनकी पहल देखकर कुछ अन्य लोग भी सफाई में मदद के लिए आगे आए।
अरेरा कॉलोनी में वालंटियर्स ने संभाली सफाई की जिम्मेदारी
भोपाल की ई-2 अरेरा कॉलोनी में हाउस ओनर्स एसोसिएशन ने सफाई की जिम्मेदारी संभाली। एसोसिएशन ने घरों से कचरा इकट्ठा कराया और लोडिंग गाड़ियों के जरिए ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाया। कर्मचारियों की हड़ताल के बीच कॉलोनी के लोगों और वालंटियर्स की यह पहल सफाई व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश है।
वेतन 25 हजार करने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
प्रदेशभर में एक लाख से ज्यादा सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं:
न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपए किया जाए।
कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
ठेका प्रथा समाप्त की जाए।
पति या पत्नी की मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
वेतन में बढ़ोतरी की जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल जारी रहेगी।
शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी
सफाई कर्मचारियों के बाद अब जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों ने भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की बात कही है। भोपाल में 2.30 लाख से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। ऐसे में जलापूर्ति प्रभावित होने पर राजधानी में पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है।