धार। धार जिले के पश्चिमी और आदिवासी बहुल इलाकों के लिए रेल कनेक्टिविटी के लिहाज से बड़ी खबर सामने आई है। डेकाकुंड-टांडा रोड रेलखंड पर पहली बार 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लोकोमोटिव का सफल स्पीड ट्रायल किया गया। इस परीक्षण के बाद रेलखंड पर यात्री ट्रेनों के संचालन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस परीक्षण का उद्देश्य नए रेलमार्ग की तकनीकी क्षमता, ट्रैक की मजबूती और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मानकों को परखना था। सफल परीक्षण के बाद क्षेत्र के लोगों में जल्द यात्री ट्रेन शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है।
120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हुआ ट्रायल
सोमवार को डेकाकुंड-टांडा रोड रेलखंड पर हुए स्पीड ट्रायल में लोको को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाया गया। परीक्षण का नेतृत्व प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता ने किया।ट्रायल के दौरान केवल ट्रेन की रफ्तार ही नहीं, बल्कि रेलपथ की मजबूती, सिग्नलिंग व्यवस्था, ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं की जांच की गई।रेलवे की तकनीकी टीम ने अलग-अलग बिंदुओं पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि रेलखंड निर्धारित मानकों के अनुरूप परिचालन के लिए तैयार है।
आरकेएम 15.68 पर भी तकनीकी जांच
स्पीड ट्रायल के दौरान आरकेएम 15.68 के आसपास तकनीकी टीम ने विशेष निरीक्षण किया। यहां रेलपथ और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा गया।रेलवे अधिकारियों के लिए यह परीक्षण इसलिए भी अहम था क्योंकि यात्री ट्रेनों के नियमित संचालन से पहले ट्रैक, बिजली, सिग्नलिंग और सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह संतोषजनक होना जरूरी होता है।120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफल परीक्षण को इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
धार के आदिवासी अंचल को मिलेगा रेल कनेक्शन
डेकाकुंड-टांडा रोड रेलखंड के शुरू होने से धार जिले के पश्चिमी और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में परिवहन की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।अब तक इस क्षेत्र के कई गांवों और कस्बों के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए सड़क परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है। रेल सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को आवागमन का एक तेज और अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प मिल सकेगा।इस रेल कनेक्टिविटी से गुजरात की ओर आने-जाने वाले लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
गुजरात से जुड़ाव होगा आसान
नया रेलखंड धार के पश्चिमी हिस्से को गुजरात से बेहतर तरीके से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़े शहरों तक पहुंच आसान होने की संभावना है।स्थानीय स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों और छोटे व्यापारियों के लिए भी रेल परिवहन महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कृषि उपज और अन्य स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी परिवहन लागत कम होने की उम्मीद है।
OHE और बिजली व्यवस्था की भी हुई जांच
स्पीड ट्रायल के दौरान रेलखंड की ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन यानी OHE व्यवस्था को भी परखा गया। ट्रैक पर इलेक्ट्रिक लोको को निर्धारित गति से चलाकर बिजली आपूर्ति की क्षमता और निरंतरता की जांच की गई।इस परियोजना को समय पर पूरा करने में बड़ौदा बिजली विभाग के रेलवे निर्माण दल के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
यात्री ट्रेन शुरू होने की बढ़ी उम्मीद
स्पीड ट्रायल सफल होने के बाद अब रेलखंड पर यात्री ट्रेन चलाने से पहले आवश्यक परिचालन और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताओं को पूरा किया जाना है।रेलवे सूत्रों के अनुसार यदि आगे की प्रक्रिया तय समय के अनुसार पूरी होती है तो दिसंबर 2026 तक डेकाकुंड-टांडा रोड के बीच यात्री ट्रेन सेवा शुरू होने की संभावना है।हालांकि नियमित यात्री ट्रेन संचालन की अंतिम तारीख रेलवे की ओर से सभी आवश्यक अनुमतियों और प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
स्थानीय लोगों को मिलेंगे कई फायदे
रेल सेवा शुरू होने के बाद धार के आदिवासी क्षेत्रों में इसका असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है।
रोजगार के अवसर
रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से व्यापार और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन मिल सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य
छात्रों और मरीजों को बड़े शहरों में स्थित शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और बाजार
कृषि एवं स्थानीय उत्पादों को दूसरे शहरों के बाजार तक पहुंचाने में रेल परिवहन उपयोगी साबित हो सकता है।
गुजरात तक आसान पहुंच
गुजरात से सीधा रेल संपर्क क्षेत्र के लोगों के लिए कारोबार और रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है।
आदिवासी क्षेत्र के विकास को मिलेगी रफ्तार
धार का पश्चिमी क्षेत्र लंबे समय से बेहतर परिवहन सुविधाओं की जरूरत महसूस करता रहा है। ऐसे में रेलखंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हुआ सफल ट्रायल सिर्फ तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।रेल सेवा शुरू होने के बाद आदिवासी अंचल के कई इलाकों को प्रदेश और पड़ोसी राज्य गुजरात के प्रमुख हिस्सों से बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।फिलहाल 120 किमी प्रति घंटे का सफल स्पीड ट्रायल पूरा होने के बाद अब निगाहें यात्री ट्रेन संचालन से जुड़ी आगामी औपचारिकताओं पर हैं। यदि प्रक्रिया तय समय में पूरी हुई, तो दिसंबर 2026 के आसपास इस रेलखंड पर यात्री ट्रेनों की शुरुआत क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी सौगात साबित हो सकती है।