मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के 2,548 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। छतरपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।मामले को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग पर निशाना साधा है। उन्होंने प्रदेशभर में हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती की जांच कराने की मांग की है।
2,548 पदों की भर्ती पर उठे सवाल
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई थी। अब छतरपुर से सामने आए कथित स्टिंग वीडियो ने इस पूरी प्रक्रिया को सवालों के घेरे में ला दिया है।विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या भर्ती में निर्धारित मेरिट और चयन प्रक्रिया का पालन किया गया या कहीं-कहीं उसे कथित रूप से प्रभावित किया गया।आरोप सामने आने के बाद मांग उठ रही है कि केवल छतरपुर तक जांच सीमित रखने के बजाय पूरे प्रदेश में हुई नियुक्तियों की समीक्षा की जाए, ताकि यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसका पता लगाया जा सके।
मेरिट के आधार पर चयन का नियम
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती में चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर की जानी थी। आरोप है कि कुछ स्थानों पर मेरिट में ऊपर रहने वाले अभ्यर्थियों के बजाय कथित रूप से ऐसे लोगों को फायदा पहुंचाया गया, जिन्होंने रिश्वत दी।
कमलनाथ ने सरकार पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से हुई आंगनबाड़ी भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई हैं।कमलनाथ ने कहा कि सरकारी नौकरी और नियुक्ति की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप बेहद गंभीर है, खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में हैं।उन्होंने सरकार से मांग की कि भर्ती प्रक्रिया की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पूरे प्रदेश में जांच की मांग
कमलनाथ का कहना है कि जांच को केवल छतरपुर जिले तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेशभर में 2,548 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया की जांच की मांग की है।उनके मुताबिक यदि चयन प्रक्रिया में कहीं भी गड़बड़ी हुई है तो उसका पता लगाने के लिए दस्तावेजों, मेरिट सूची, चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों की समीक्षा आवश्यक है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने के आसार
आंगनबाड़ी भर्ती से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा बना रहा है, जबकि अब सरकार की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजर है।यदि सरकार प्रदेशस्तरीय जांच के आदेश देती है तो भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और चयन सूची की व्यापक समीक्षा हो सकती है। वहीं यदि जांच केवल शिकायत वाले जिले तक सीमित रहती है, तो विपक्ष इसे लेकर आगे भी सवाल उठा सकता है।
अब जांच के नतीजे पर टिकी नजर
छतरपुर DPO से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो ने आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं, लेकिन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी।फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूरे मध्य प्रदेश में 2,548 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका पदों की भर्ती की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।