कटनी। कटनी जिले में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनके खिलाफ दर्ज हुई अवैध वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पहले इस मामले की जांच कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कमल मौर्य कर रहे थे, लेकिन अब दोनों प्रमुख जांचों को कटनी से हटाकर जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंप दिया गया है।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता महेंद्र जैन और मामले से जुड़े गवाह जबलपुर पहुंचकर एएसपी अनु बेनीवाल के समक्ष अपने बयान दर्ज कराएंगे। विभाग का कहना है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
ट्रांसपोर्टर ने लगाए अवैध वसूली के आरोप
मामले की शुरुआत एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र कुमार जैन की शिकायत से हुई। उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि वाहन जांच के दौरान उनकी हाईवा गाड़ी को रोककर उनसे 30 हजार रुपये की मांग की गई।
शिकायत के अनुसार, मौके पर 25 हजार रुपये नकद लिए गए, जबकि शेष 5 हजार रुपये अगले दिन चालक के माध्यम से मंगवाए गए। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ कुछ दस्तावेज और कथित साक्ष्य भी सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रारंभिक कार्रवाई में चालक निलंबित
शिकायत मिलने के बाद कटनी पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रारंभिक जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान सीएसपी के चालक आरक्षक केशव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।इसके साथ ही प्रारंभिक जांच की जिम्मेदारी एएसपी कमल मौर्य को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को जिले से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया।
तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया
मामले के बीच पुलिस विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए। नए कार्य विभाजन आदेश के तहत सीएसपी नेहा पच्चीसिया के कार्यक्षेत्र से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थानों का प्रभार वापस ले लिया गया। इन थानों की जिम्मेदारी अब अनुसूचित जाति-जनजाति (अजाक) डीएसपी शिवा पाठक को सौंपी गई है।हालांकि, विभाग की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी सार्वजनिक नहीं की गई है।
शिकायतकर्ता का क्या है दावा?
शिकायतकर्ता महेंद्र जैन का कहना है कि उनके पास पांच हाईवा वाहन हैं, जिनका उपयोग रेत और डोलोमाइट के परिवहन में किया जाता है। उनका आरोप है कि 21 जुलाई की रात वाहन जांच के दौरान उनसे पैसों की मांग की गई। राशि नहीं देने पर वाहन को थाने में खड़ा कर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की।
कौन हैं सीएसपी नेहा पच्चीसिया?
नेहा पच्चीसिया मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने वाली नेहा ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई पूरी की और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।उन्होंने वर्ष 2012 से 2016 तक लगातार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षाएं दीं। वर्ष 2016 में हुए इंटरव्यू के बाद उनका चयन एक साथ कई पदों के लिए हुआ। उन्होंने एमपीपीएससी में 20वीं रैंक हासिल कर विशेष पहचान बनाई और बाद में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के रूप में चयनित हुईं।
एयर होस्टेस की नौकरी छोड़कर बनीं पुलिस अधिकारी
डीएसपी बनने से पहले नेहा पच्चीसिया एयर होस्टेस के रूप में भी काम कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने कई निजी कंपनियों में नौकरी करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। उनकी पहली सरकारी नियुक्ति महिला एवं बाल विकास विभाग में हुई थी, लेकिन उन्होंने पुलिस सेवा में आने का लक्ष्य नहीं छोड़ा।लगातार प्रयासों के बाद उनका चयन डीएसपी पद पर हुआ और उन्होंने पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं शुरू कीं।
कोरोना काल में मिला था सम्मान
कोरोना महामारी के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नेहा पच्चीसिया को सम्मानित भी किया था। उस समय उनके कार्यों की काफी सराहना हुई थी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है। जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेंगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय होगी।वहीं, इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।