उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव इस साल नवंबर–दिसंबर 2026 में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके पीछे मुख्य कारण अगले साल प्रस्तावित जनगणना का दूसरा चरण बताया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक कर्मचारियों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
जनगणना शेड्यूल बना चुनाव की समयसीमा का कारण
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि फरवरी 2027 में जनगणना का दूसरा चरण शुरू होने से पहले चुनाव कराना ज्यादा व्यावहारिक होगा। यह चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी तक चल सकता है, जिसमें बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों की तैनाती की जरूरत होगी।
उत्तर प्रदेश में लगभग 5.5 लाख कर्मचारी
पंजाब में करीब 2 लाख कर्मचारी
उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में लगभग 50-50 हजार कर्मचारी
ऐसे में चुनाव और जनगणना दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ संभालना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।
मतदाता सूची को लेकर आयोग का रुख
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यदि चुनाव नवंबर में होते हैं तो मतदाता सूची को लेकर कोई बड़ी बाधा नहीं होगी। इन राज्यों में SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है। आवश्यकता पड़ने पर जनवरी में तैयार सूची को पहले ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।
भाजपा संगठन ने दिए तैयारियों के संकेत
भाजपा के तीन राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब- की इकाइयों ने संकेत दिया है कि पार्टी नेतृत्व ने चुनावी तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
बूथ स्तर की समितियों को मजबूत करने का निर्देश
संगठनात्मक नियुक्तियों को जल्द पूरा करने की सलाह
जुलाई के पहले सप्ताह तक सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने का लक्ष्य
हालांकि, उत्तराखंड को लेकर माना जा रहा है कि पहाड़ी क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण की प्रक्रिया बाद में होने के कारण यहां चुनाव कार्यक्रम अलग हो सकता है।
विपक्ष में भी बढ़ी हलचल
जल्द चुनाव की संभावनाओं के बीच विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में भी सक्रियता बढ़ गई है। हाल ही में हुई बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच इस मुद्दे पर चर्चा होने की बात सामने आई है।