पटना: बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को ‘वन ऑफिसर-वन मॉडल स्कूल’ व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत अधिकारी सीधे मॉडल स्कूलों से जुड़े रहेंगे और वहां सामने आने वाली समस्याओं के समयबद्ध समाधान की निगरानी करेंगे।
551 मॉडल स्कूलों से जुड़ेंगे अधिकारी
सरकार की इस व्यवस्था के केंद्र में राज्य के 551 मॉडल स्कूल हैं। इन स्कूलों को ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ के नाम से विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक स्कूल के साथ एक अधिकारी को सीधे जोड़े जाने का उद्देश्य यह है कि स्कूलों की समस्याएं केवल कागजी स्तर पर न रहें, बल्कि उनका समाधान तय समय सीमा में कराया जा सके।
स्कूलों की पढ़ाई और व्यवस्थाओं पर रहेगी सीधी नजर
अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार का जोर स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुशासन, विद्यार्थियों की सुविधाओं और प्रशासनिक समस्याओं की नियमित निगरानी पर है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में सरकारी स्कूलों की मॉनिटरिंग मजबूत करने और छात्रों के समग्र विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
551 मॉडल स्कूल पहले ही हो चुके हैं शुरू
बिहार सरकार ने जुलाई 2026 में राज्यभर में 551 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) शुरू किए थे। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार इन स्कूलों में करीब 4 लाख बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था होगी। सरकार का लक्ष्य इन मॉडल स्कूलों के जरिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देना है।
स्मार्ट क्लास से लेकर आधुनिक लैब तक की सुविधा
इन मॉडल स्कूलों को सामान्य सरकारी स्कूलों से अलग सुविधाओं से लैस करने की योजना है। यहां स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक कंप्यूटर लैब, भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान की प्रयोगशालाएं तथा डिजिटल शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही दूरदराज के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पहुंचाने के लिए बिहार स्कूल लाइव क्लासेज जैसी व्यवस्था भी शामिल है।
कक्षा 9 से JEE और NEET की तैयारी
मॉडल स्कूलों की एक अहम विशेषता यह होगी कि विद्यार्थियों को कक्षा 9 से ही JEE, NEET और ओलंपियाड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए शुरुआती स्तर से तैयार करना है।
निजी स्कूलों के स्तर की शिक्षा देने की कोशिश
सरकार इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ विकसित कर रही है, ताकि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के विद्यार्थियों को भी निजी स्कूलों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। शिक्षा विभाग की योजना के तहत मॉडल स्कूलों को केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
551 से आगे 1001 मॉडल स्कूल बनाने का लक्ष्य
बिहार सरकार की योजना मौजूदा 551 मॉडल स्कूलों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक राज्य में अब तक 551 मॉडल स्कूल बनाए जा चुके हैं और सरकार ने इनकी संख्या बढ़ाकर 1001 करने का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, अनुशासन और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करने की तैयारी है।
‘उन्नत शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य’ पर फोकस
मॉडल स्कूलों की यह पहल बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-3 (2025-30)’ के तहत चल रहे ‘उन्नत शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य’ कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार का फोकस केवल स्कूल भवन और सुविधाएं बढ़ाने पर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता को विकसित करने पर भी है।
सरकार का मानना है कि ‘वन ऑफिसर-वन मॉडल स्कूल’ व्यवस्था से अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय होगी और स्कूल स्तर की समस्याओं का समाधान तेजी से कराया जा सकेगा। अब इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिकारियों की निगरानी कितनी नियमित और प्रभावी रहती है।