MP Anganwadi THR: मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों और महिलाओं तक पहुंचने वाले पूरक पोषण आहार की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब टेक होम राशन (THR) तैयार करने और उसे हितग्राहियों तक पहुंचाने में स्थानीय स्व-सहायता समूहों की भूमिका बढ़ाई गई है। नई व्यवस्था के तहत स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया पोषण आहार आंगनवाड़ी से जुड़े पात्र बच्चों और महिलाओं तक पहुंचाया जा रहा है। यह बदलाव केवल पोषण आहार की आपूर्ति तक सीमित नहीं है। इसके साथ बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, वृद्धि की निगरानी, कुपोषित बच्चों की पहचान, परिवारों से संपर्क और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य संस्थानों तक रेफर करने की व्यवस्था को भी जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य है कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से मिलने वाली पोषण सेवाएं ज्यादा व्यवस्थित तरीके से जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचें।
आंगनवाड़ी THR व्यवस्था में क्या बदला?
मध्यप्रदेश में पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत लंबे समय से आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पोषण संबंधी सेवाएं दी जाती रही हैं। अब टेक होम राशन की व्यवस्था में स्थानीय स्व-सहायता समूहों को जोड़कर इसे अधिक स्थानीय और विकेंद्रीकृत बनाने पर जोर दिया गया है।इस व्यवस्था में स्थानीय समूह पोषण आहार तैयार करेंगे और संबंधित पात्र हितग्राहियों तक इसे पहुंचाने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।इससे सरकार को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर पोषण आहार की उपलब्धता बेहतर होगी और इसकी आपूर्ति को जरूरत के अनुसार व्यवस्थित किया जा सकेगा। साथ ही, स्व-सहायता समूहों को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
किन लोगों को मिलेगा आंगनवाड़ी से पोषण आहार?
पूरक पोषण कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है।आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से मुख्य रूप से इन वर्गों को सेवाएं दी जाती हैं-
6 महीने से 3 वर्ष तक के बच्चे
3 से 6 वर्ष तक के बच्चे
गर्भवती महिलाएं
धात्री माताएं
गंभीर कुपोषण से प्रभावित बच्चे
कम वजन वाले बच्चे
पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कम से कम 300 दिनों तक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
3 से 6 साल के बच्चों को आंगनवाड़ी में मिलेगा गर्म भोजन
3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र पर ही पोषण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उपलब्ध कराया जाता है। इन बच्चों को केंद्र पर नाश्ते के साथ गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उनके विकास के लिए जरूरी पोषण की कमी को दूर करने में सहायता करना है। छोटे बच्चों के लिए व्यवस्था कुछ अलग रखी गई है, क्योंकि वे पूरे दिन आंगनवाड़ी केंद्र पर नहीं रहते। ऐसे बच्चों के लिए टेक होम राशन की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
6 महीने से 3 साल के बच्चों और माताओं को कैसे मिलेगा THR?
6 महीने से 3 साल तक के बच्चों के अलावा गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए टेक होम राशन व्यवस्था के तहत पोषण आहार घर ले जाने की सुविधा दी जाती है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, इन हितग्राहियों के लिए मंगलवार को गर्म भोजन और सप्ताह के अन्य दिनों में टेक होम राशन देने की व्यवस्था है। इसका फायदा यह है कि बच्चे और महिलाएं घर पर रहते हुए भी पूरक पोषण आहार प्राप्त कर सकेंगी। खासतौर पर ऐसे परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, जहां छोटे बच्चों को रोजाना आंगनवाड़ी केंद्र तक लाना संभव नहीं होता।
स्थानीय स्व-सहायता समूहों को मिली बड़ी भूमिका
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव स्थानीय स्व-सहायता समूहों की भागीदारी को लेकर है। अब स्थानीय स्तर पर काम करने वाले समूहों को THR तैयार करने और उसकी आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इससे पोषण आहार की व्यवस्था गांव और स्थानीय क्षेत्र के स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। इस मॉडल के दो संभावित फायदे हैं। पहला, आंगनवाड़ी हितग्राहियों तक पोषण आहार पहुंचाने की स्थानीय व्यवस्था मजबूत होगी। दूसरा, स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा सकेगा। यानी नई व्यवस्था में पोषण और स्थानीय आजीविका, दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है।
गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए अलग पोषण व्यवस्था
आंगनवाड़ी व्यवस्था में सामान्य बच्चों के साथ-साथ ऐसे बच्चों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें गंभीर कुपोषण की स्थिति पाई जाती है। आपके दिए विवरण के अनुसार, 6 से 60 महीने की उम्र के अति गंभीर कुपोषित यानी SAM बच्चों और 6 से 72 महीने तक के अति कम वजन वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार की व्यवस्था की गई है। ऐसे बच्चों की केवल भोजन के आधार पर निगरानी नहीं की जाती, बल्कि उनकी वृद्धि और स्वास्थ्य की स्थिति का भी आकलन किया जाता है।
बच्चों का वजन और लंबाई नियमित रूप से मापी जाएगी
बच्चे की पोषण स्थिति समझने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि उसे भोजन मिल रहा है या नहीं। उसकी उम्र के हिसाब से वृद्धि भी देखना जरूरी होता है। इसी वजह से आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और लंबाई/ऊंचाई मापने की व्यवस्था है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि बच्चे का शारीरिक विकास सामान्य तरीके से हो रहा है या उसे अतिरिक्त पोषण अथवा स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है। इन जानकारियों को पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाता है। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए बच्चों की पोषण स्थिति पर समय-समय पर निगरानी रखने में मदद मिल सकती है।
हर महीने होगी बच्चों की स्क्रीनिंग
बच्चों की स्वास्थ्य और पोषण स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए हर महीने विशेष शारीरिक माप और स्क्रीनिंग गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। आपके दिए विवरण के अनुसार, हर महीने 10 दिवसीय शारीरिक माप दिवस आयोजित किए जाते हैं। इसमें जन्म से लेकर 6 वर्ष तक के बच्चों की जांच और स्क्रीनिंग की जाती है। इस दौरान यदि किसी बच्चे में कुपोषण या कोई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या दिखाई देती है, तो उसे आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए संबंधित विभाग के साथ समन्वय किया जाता है।
जरूरत पड़ने पर पोषण पुनर्वास केंद्र भेजे जाएंगे बच्चे
अगर स्क्रीनिंग के दौरान किसी बच्चे की स्थिति ऐसी पाई जाती है, जिसमें सामान्य आंगनवाड़ी पोषण सेवाओं से अधिक चिकित्सा या पोषण सहायता की जरूरत है, तो उसे आगे की स्वास्थ्य सुविधा के लिए रेफर किया जा सकता है। गंभीर मामलों में बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजने की व्यवस्था भी की जाती है। इससे आंगनवाड़ी केंद्र केवल भोजन वितरण का स्थान नहीं रह जाता, बल्कि बच्चे की पोषण स्थिति की पहचान और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बनाने की शुरुआती कड़ी के रूप में भी काम करता है।
घर जाकर भी बच्चों की स्थिति का लिया जाएगा फॉलोअप
सरकार की पोषण व्यवस्था को केवल आंगनवाड़ी केंद्र तक सीमित नहीं रखा गया है। मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी जरूरत के अनुसार परिवारों से संपर्क कर बच्चों की स्थिति का फॉलोअप भी करते हैं। गृहभेंट के दौरान परिवार को बच्चों के खान-पान, साफ-सफाई और पोषण से संबंधित जरूरी जानकारी दी जाती है। इसका एक उद्देश्य यह भी है कि परिवार को यह समझाया जा सके कि आंगनवाड़ी से मिलने वाला पोषण आहार किस तरह उपयोग करना है और बच्चे के दैनिक भोजन में किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
परिवारों को पोषण और खान-पान की जानकारी भी दी जाएगी
कई बार बच्चे को उपलब्ध पोषण सेवाओं का लाभ मिलने के बावजूद घर पर सही खान-पान नहीं मिल पाने के कारण समस्या बनी रहती है। इसलिए परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। गृहभेंट और आंगनवाड़ी गतिविधियों के माध्यम से परिवारों को बच्चों की उम्र के अनुसार भोजन, पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है। इससे बच्चों के पोषण को केवल सरकारी आहार तक सीमित रखने के बजाय घर के भोजन और देखभाल से भी जोड़ने की कोशिश होगी।
जनजातीय क्षेत्रों में भी पोषण सेवाओं का विस्तार
मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पोषण सेवाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खास तौर पर सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों से जुड़े क्षेत्रों में बच्चों और माताओं तक पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ऐसे क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों और सुविधाओं तक पहुंच से जुड़ी अलग-अलग चुनौतियां हो सकती हैं। इसलिए नए आंगनवाड़ी केंद्रों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सेवाओं के जरिए अधिक परिवारों को कवर करने की कोशिश की जा रही है।
PM जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत 681 नए आंगनवाड़ी केंद्र
आपके दिए विवरण के अनुसार, प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत मध्यप्रदेश में 681 नए आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है। इन केंद्रों के जरिए केवल पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि बच्चों की वृद्धि की निगरानी, स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर रेफरल जैसी सेवाओं को भी मजबूत करने की कोशिश है। इससे विशेष जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों और महिलाओं को उनके आसपास ही पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मिलने की संभावना बढ़ेगी।
नई व्यवस्था से SHG को क्या फायदा होगा?
THR व्यवस्था में स्थानीय स्व-सहायता समूहों को शामिल करने से महिलाओं के समूहों के लिए काम के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय स्तर पर पोषण आहार तैयार करने की जिम्मेदारी मिलने से समूहों की आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। साथ ही, स्थानीय लोगों की भागीदारी होने से पोषण आहार तैयार करने और वितरित करने की प्रक्रिया क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार अधिक व्यवस्थित की जा सकती है। इस तरह सरकार की यह पहल महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और पोषण सेवाओं को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के दोहरे उद्देश्य के साथ आगे बढ़ती दिखाई देती है।
सरकार का फोकस सिर्फ THR वितरण पर नहीं
नई व्यवस्था को केवल टेक होम राशन के वितरण में बदलाव के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसके साथ बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग, वजन और ऊंचाई की निगरानी, पोषण ट्रैकर पर रिकॉर्ड, घर जाकर फॉलोअप और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्रों तक रेफरल जैसी व्यवस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पोषण संबंधी समस्या की पहचान समय रहते हो और जरूरतमंद बच्चे को अतिरिक्त सहायता मिल सके।
आंगनवाड़ी व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर बढ़ेगी भागीदारी
स्थानीय स्व-सहायता समूहों को THR से जोड़ने के बाद आंगनवाड़ी पोषण व्यवस्था में समुदाय की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर समूहों की सक्रियता से पोषण आहार तैयार करने और वितरण की प्रक्रिया को अधिक विकेंद्रीकृत किया जा सकेगा। साथ ही, इससे महिलाओं के समूहों को नियमित आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का अवसर भी मिलेगा। हालांकि, नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पोषण आहार की गुणवत्ता, नियमित आपूर्ति, स्वच्छता और वितरण की निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की जाती है।