Shehzad Poonawalla News: भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के कुछ ही दिनों बाद शहजाद पूनावाला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। लंबे समय तक बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे पूनावाला ने अब कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी छोड़ने के बाद कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों को उम्मीद थी कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ बयान देंगे। जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ कथित तौर पर एक अभियान शुरू किया गया। पूनावाला ने एक हालिया वीडियो में दावा किया कि कांग्रेस से जुड़े लोगों का एक कथित ‘इकोसिस्टम’ कुछ पत्रकारों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को उनके खिलाफ बोलने के लिए प्रभावित कर रहा है। उन्होंने अपने खिलाफ ‘सुपारी’ दिए जाने तक का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों को साबित करने के लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया है।दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी से अलग होने के बावजूद पूनावाला का राजनीतिक रुख कांग्रेस के खिलाफ ही नजर आ रहा है। उनके ताजा बयानों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी छोड़ने के बाद उनकी राजनीतिक दिशा बदलने वाली है या वह आगे भी उसी विचारधारा के मुद्दों पर मुखर रहेंगे, जिनके लिए वह बीजेपी के प्रवक्ता के तौर पर जाने जाते थे।
बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद क्यों चर्चा में हैं पूनावाला?
शहजाद पूनावाला ने 17 अगस्त 2026 को बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दोबारा सौंपा। इससे पहले 30 जुलाई को भी उन्होंने इस्तीफा दिया था, लेकिन उस समय पार्टी नेतृत्व ने उनसे फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था। दूसरी बार इस्तीफा देते हुए पूनावाला ने इसे अंतिम निर्णय बताया। उन्होंने अपने फैसले के पीछे आर्थिक और निजी परिस्थितियों का हवाला दिया और कहा कि वह आगे निजी क्षेत्र में जाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, इस्तीफे के साथ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि पार्टी संगठन से अलग होने का अर्थ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या बीजेपी की विचारधारा से दूरी बनाना नहीं है। यानी उनका पार्टी छोड़ने का फैसला राजनीतिक विचारधारा बदलने के तौर पर पेश नहीं किया गया था।
इस्तीफे के पीछे आर्थिक परेशानी भी बताई
बीजेपी से अलग होने के दो दिन बाद दिए गए एक इंटरव्यू में पूनावाला ने अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर भी खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को नियमित वेतन नहीं मिलने की वजह से उनके लिए आर्थिक जिम्मेदारियां संभालना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने अपने किराए और रोजमर्रा के खर्चों का जिक्र करते हुए कहा था कि निजी क्षेत्र में जाने का फैसला इन्हीं परिस्थितियों से जुड़ा है। इससे पहले इस्तीफे के वक्त भी उन्होंने आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ही अपने फैसले का प्रमुख कारण बताया था। इसलिए उनके ताजा राजनीतिक बयानों को सीधे तौर पर बीजेपी छोड़ने के बाद विचारधारा बदलने से जोड़ना सही नहीं होगा।
‘बीजेपी छोड़ने के बाद मोदी पर हमला करेंगे’, पूनावाला का कांग्रेस पर आरोप
अब अपने ताजा बयान में पूनावाला ने कांग्रेस से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के कुछ लोगों को लगा कि वह अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ बोलना शुरू कर देंगे। पूनावाला के मुताबिक, कुछ लोगों ने उनसे संपर्क भी किया और बीजेपी छोड़ने के फैसले को लेकर उनसे सहानुभूति जताई। लेकिन उन्होंने मोदी और बीजेपी के खिलाफ अपनी राजनीतिक स्थिति बदलने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया और कुछ पत्रकारों के माध्यम से कथित तौर पर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने इसी संदर्भ में ‘सुपारी’ दिए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में फिलहाल कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत सामने नहीं आया है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
पूनावाला ने अपने ताजा बयानों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी छोड़ने के बाद भी वह कांग्रेस के खिलाफ अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि अब पार्टी प्रवक्ता के तौर पर उन पर जो संगठनात्मक सीमाएं थीं, वे नहीं हैं और वह अपनी बात ज्यादा स्वतंत्र तरीके से रख सकते हैं। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर भी उन्होंने बेहद तीखी टिप्पणी की है। यानी बीजेपी से इस्तीफा देने के बावजूद पूनावाला के राजनीतिक हमले का मुख्य निशाना कांग्रेस और राहुल गांधी ही बने हुए हैं।
कांग्रेस में वापसी की अटकलों पर भी पूनावाला ने दिया जवाब
बीजेपी छोड़ने के बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठने लगा था कि क्या शहजाद पूनावाला वापस कांग्रेस में जा सकते हैं। आखिरकार उनका राजनीतिक सफर कांग्रेस से ही शुरू हुआ था और 2017 में वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। लेकिन हालिया बातचीत में पूनावाला ने कांग्रेस में वापसी को लेकर ऐसी शर्तें रखीं, जिनसे फिलहाल वापसी की संभावना बेहद मुश्किल नजर आती है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि कांग्रेस में लौटने की स्थिति तभी बन सकती है, जब गांधी परिवार के प्रमुख नेताओं की पार्टी नेतृत्व में भूमिका खत्म हो और कांग्रेस अपने कुछ ऐतिहासिक राजनीतिक फैसलों को लेकर माफी मांगे। इस बयान के बाद साफ है कि बीजेपी छोड़ने के बावजूद पूनावाला फिलहाल कांग्रेस के साथ राजनीतिक नजदीकी बनाने की कोशिश करते नजर नहीं आ रहे हैं।
कांग्रेस से बीजेपी तक ऐसा रहा है पूनावाला का राजनीतिक सफर
शहजाद पूनावाला का कांग्रेस से पुराना राजनीतिक संबंध रहा है। उन्होंने 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का रुख किया था। इसके बाद वह बीजेपी के प्रमुख टीवी प्रवक्ताओं में शामिल हो गए और कांग्रेस तथा विपक्षी नेताओं पर लगातार आक्रामक तरीके से निशाना साधते रहे। बीजेपी में रहते हुए वह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर कई राजनीतिक बहसों में नजर आते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के पक्ष में उनका मुखर रुख उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन गया था। इसी वजह से बीजेपी से उनके इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या वह अब कांग्रेस में लौटेंगे या राजनीति से अलग दिशा में जाएंगे। अभी तक उनके बयानों से कांग्रेस में वापसी के संकेत नहीं मिलते।
पार्टी छोड़ी, लेकिन विचारधारा बदलने से किया इनकार
पूनावाला के इस्तीफे के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर काफी चर्चा हुई। हालांकि उन्होंने खुद यह स्पष्ट किया कि वह बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे से बाहर जा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की विचारधारा के प्रति उनका समर्थन खत्म नहीं हुआ है। इसका असर उनके हालिया बयानों में भी दिखाई दे रहा है। पार्टी छोड़ने के बाद भी उनके हमले कांग्रेस और राहुल गांधी पर केंद्रित हैं। ऐसे में यह कहना ज्यादा उचित होगा कि फिलहाल उनका बीजेपी से संगठनात्मक रिश्ता खत्म हुआ है, लेकिन राजनीतिक विचारों में बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।
‘सुपारी’ वाले आरोप के बाद बढ़ा सियासी विवाद
पूनावाला का ताजा बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अपने खिलाफ कथित अभियान को सीधे कांग्रेस से जुड़े लोगों से जोड़ने की कोशिश की है। ‘सुपारी’ जैसे शब्द के इस्तेमाल ने इस राजनीतिक विवाद को और तीखा बना दिया है। हालांकि, किसी भी ऐसे आरोप को तथ्य के तौर पर स्थापित करने के लिए स्वतंत्र प्रमाण जरूरी होते हैं। फिलहाल पूनावाला ने अपने वीडियो में दावा जरूर किया है, लेकिन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस पूरे मामले में कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।
अब आगे क्या होगा?
पूनावाला के बीजेपी छोड़ने के बाद उनकी अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें जारी हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र में जाने की बात कही है, लेकिन साथ ही राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता भी बनाए रखी है। खास तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ उनके लगातार बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी से संगठनात्मक दूरी के बावजूद वह राजनीतिक बहस से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं। अब उनके ‘सुपारी’ वाले आरोप पर कांग्रेस या उसके नेताओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और पूनावाला आगे अपनी राजनीतिक गतिविधियों को किस रूप में जारी रखते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।