MP Digital Farmer ID: मध्यप्रदेश में किसानों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने के लिए डिजिटल फार्मर ID बनाने का अभियान तेज किया गया है। सरकार की कोशिश है कि किसान की जमीन, फसल और कृषि से जुड़ी जरूरी जानकारी को एक डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाए, ताकि अलग-अलग सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया आसान हो सके। आपके दिए गए विवरण के मुताबिक, 20 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान गांवों में शिविर लगाकर उन किसानों की पहचान की जाएगी, जिनकी फार्मर ID अभी तक तैयार नहीं हुई है। कृषि, राजस्व, सहकारिता और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की टीमें इस अभियान में किसानों की सहायता करेंगी। हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। उपलब्ध आधिकारिक विधानसभा जानकारी के अनुसार 30 जून 2026 तक मध्यप्रदेश में 1,11,88,295 किसानों की फार्मर ID बनाई जा चुकी थी और जिन किसानों की ID नहीं बनी है, उनके लिए प्रक्रिया जारी है। आधिकारिक जानकारी में यह भी बताया गया है कि ई-विकास पोर्टल के जरिए ऐसे किसानों के लिए उर्वरक खरीद से संबंधित ई-टोकन की सुविधा उपलब्ध है।
डिजिटल फार्मर ID क्या है और क्यों जरूरी मानी जा रही है?
डिजिटल फार्मर ID को किसानों की एक ऐसी डिजिटल पहचान के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें खेती और जमीन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को एक सिस्टम में जोड़ा जा सके। इसमें किसान की भूमि संबंधी जानकारी के साथ कृषि से जुड़ा डेटा लिंक किए जाने का उद्देश्य है। इससे भविष्य में किसान को अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। सरकार का व्यापक उद्देश्य कृषि योजनाओं की पहुंच बेहतर करना, लाभार्थी की पहचान आसान बनाना और कृषि सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है।
15 सितंबर तक चलेगा विशेष अभियान
किसानों की फार्मर ID बनाने के लिए 20 अगस्त से विशेष अभियान शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है। यह अभियान 15 सितंबर 2026 तक चलाया जाएगा। अभियान के दौरान गांव और पंचायत स्तर पर ऐसे किसानों को चिन्हित किया जाएगा, जिनकी डिजिटल फार्मर ID अभी नहीं बनी है। इसके बाद संबंधित किसानों की सहायता के लिए कैंप आयोजित किए जाएंगे। कृषि और राजस्व विभाग के साथ सहकारिता तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भी अभियान में सहयोग करेंगे। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पात्र किसानों को डिजिटल किसान रजिस्ट्री से जोड़ना है।
बिना फार्मर ID किन सुविधाओं पर पड़ सकता है असर?
फार्मर ID को धीरे-धीरे कृषि से जुड़ी विभिन्न डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। ऐसे में जिन किसानों की ID अभी तक नहीं बनी है, उन्हें सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आपके दिए गए विवरण के अनुसार इसमें मुख्य रूप से ये सुविधाएं शामिल हैं:
समर्थन मूल्य पर फसल बेचने से जुड़ी प्रक्रिया
खाद और बीज से संबंधित सरकारी सहायता
कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित सेवाएं
किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया
कृषि अनुदान और दूसरी डिजिटल कृषि सेवाएं
सहकारी समितियों से जुड़ी सुविधाएं
भविष्य में डिजिटल माध्यम से मिलने वाली अन्य कृषि योजनाएं
हालांकि, हर योजना में फार्मर ID की अनिवार्यता और अंतिम समयसीमा अलग सरकारी आदेश से तय हो सकती है, इसलिए किसी एक तारीख को सभी आठ योजनाओं के लिए समान रूप से लागू मानने से पहले संबंधित विभाग की अधिसूचना देखना जरूरी है।
MP में पहले ही बन चुकी हैं 1.11 करोड़ से ज्यादा Farmer ID
मध्यप्रदेश विधानसभा में दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 30 जून 2026 तक 1,11,88,295 किसानों की फार्मर ID बनाई जा चुकी थी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि फार्मर ID किसान के माध्यम से ही बनाई जा सकती है और इसके लिए प्रक्रिया लगातार जारी है। यानी जिन किसानों की ID अभी नहीं बनी है, उनके लिए व्यवस्था बंद नहीं हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में डिजिटल किसान रजिस्ट्री का काम बड़े स्तर पर चल रहा है।
रबी सीजन से भी जोड़ा जा रहा अभियान
फार्मर ID बनाने की प्रक्रिया को रबी सीजन की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और सहकारी व्यवस्था को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत पात्र किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने और खाद से संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की तैयारी है। जिन किसानों को अग्रिम खाद की जरूरत है, उनके लिए ई-टोकन जैसी डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। आधिकारिक विधानसभा जवाब में भी बताया गया है कि जिन किसानों की फार्मर ID नहीं बनी है, उनके लिए ई-विकास पोर्टल पर उर्वरक खरीद के लिए ई-टोकन जनरेट करने की सुविधा उपलब्ध है।
राजस्व विभाग संभालेगा जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ा काम
फार्मर ID की पूरी व्यवस्था में राजस्व विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। किसान की डिजिटल पहचान को उसके जमीन संबंधी रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया इसी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। ग्राम पंचायत स्तर पर उन किसानों की जानकारी जुटाई जा सकती है, जिनकी ID अभी तैयार नहीं हुई है। इसके बाद शिविरों के माध्यम से छूटे हुए किसानों की प्रक्रिया पूरी कराने में मदद की जाएगी। जमीन से जुड़े खसरा और अन्य राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल किसान पहचान से जोड़ने का उद्देश्य यह है कि किसान और उसकी कृषि भूमि से संबंधित जानकारी एक ही डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध हो सके।
सहकारिता विभाग से जुड़ेगा PACS और KCC का काम
अभियान में सहकारिता विभाग की भी भूमिका रखी गई है। किसानों को प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) से जोड़ने और पात्र किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता की जा सकती है। इससे किसानों को खेती के लिए जरूरी ऋण और सहकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में मदद मिल सकती है। रबी सीजन में खाद की मांग बढ़ने से पहले किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने का उद्देश्य भी इसी पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
पंचायत स्तर पर लगाए जाएंगे कैंप
गांवों में अभियान को पहुंचाने की जिम्मेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भी होगी। पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक जैसे स्थानीय कर्मचारी किसानों तक जानकारी पहुंचाने और शिविरों के आयोजन में सहयोग करेंगे। कैंप में किसानों को डिजिटल फार्मर ID से जुड़ी प्रक्रिया समझाने के साथ उनके जरूरी विवरण दर्ज कराने में सहायता की जाएगी। ग्रामीण स्तर पर अभियान चलाने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जिन किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया समझने या पूरा करने में परेशानी होती है, वे स्थानीय शिविर में जाकर सहायता ले सकेंगे।
कृषि विभाग देगा कर्मचारियों को प्रशिक्षण
अभियान को सही तरीके से लागू करने के लिए कृषि विभाग से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की जा रही है। कर्मचारियों को डिजिटल पोर्टल, ई-विकास पोर्टल और ई-टोकन से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही किसानों को मिट्टी की जांच, खाद के संतुलित इस्तेमाल और खेती से जुड़ी अन्य उपयोगी जानकारी देने पर भी जोर दिया जा सकता है। इसका मकसद सिर्फ ID बनाना नहीं, बल्कि किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ना भी है।
किसान कैसे बनवा सकते हैं Digital Farmer ID?
फार्मर ID की प्रक्रिया किसान रजिस्ट्री से जुड़ी है। मध्यप्रदेश में इसकी प्रक्रिया को सरकारी स्तर पर लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। यदि किसी किसान की फार्मर ID अभी नहीं बनी है, तो उसे अपने स्थानीय पंचायत स्तर के शिविर, संबंधित कृषि कार्यालय या राजस्व विभाग की स्थानीय व्यवस्था के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। किसान को अपनी पहचान और भूमि संबंधी जानकारी के सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है। अलग-अलग जिले में कैंप और स्थानीय प्रक्रिया की जानकारी संबंधित विभाग द्वारा दी जा सकती है। यह भी ध्यान रखें कि किसान की फार्मर ID उसी किसान के माध्यम से बनाई जा सकती है, जैसा कि मध्यप्रदेश विधानसभा में सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है।
ID बनवाने से पहले इन दस्तावेजों की जानकारी रखें
स्थानीय प्रक्रिया के अनुसार किसान से पहचान और भूमि से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इसलिए कैंप या संबंधित कार्यालय जाने से पहले अपने जरूरी रिकॉर्ड तैयार रखना उपयोगी रहेगा। आम तौर पर किसान को अपनी आधार संबंधी जानकारी, मोबाइल नंबर और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, दस्तावेजों की अंतिम आवश्यकता स्थानीय विभागीय प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है।
क्या 15 सितंबर के बाद सभी योजनाओं का लाभ बंद हो जाएगा?
यहां किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि 15 सितंबर की तारीख को सभी सरकारी योजनाओं के लिए एक समान अंतिम कटऑफ मानना सही नहीं होगा। आपके दिए गए समाचार में 15 सितंबर तक विशेष अभियान की बात है। वहीं आधिकारिक विधानसभा जवाब में 30 जून तक बने Farmer ID के आंकड़े और लगातार जारी प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। इसलिए किसानों को घबराने के बजाय जल्द से जल्द अपनी फार्मर ID की स्थिति जांचनी चाहिए और यदि ID नहीं बनी है तो स्थानीय शिविर या संबंधित विभाग से प्रक्रिया पूरी कराने की जानकारी लेनी चाहिए।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पूरी व्यवस्था?
डिजिटल फार्मर ID को केवल एक पहचान नंबर के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य किसान की जमीन और कृषि गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड को एक डिजिटल सिस्टम में व्यवस्थित करना है। आने वाले समय में यदि अधिक कृषि योजनाओं और सेवाओं को इसी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाता है, तो किसान के लिए आवेदन, पात्रता सत्यापन और लाभ वितरण की प्रक्रिया आसान हो सकती है। सरकार के लिए भी इससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिल सकती है।