वार्षिक अमरनाथ यात्रा के समापन चरण में अब भगवान शिव की पवित्र छड़ी ‘छड़ी मुबारक’ की परंपरागत यात्रा प्रमुख आकर्षण बनने जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पवित्र छड़ी को भगवान शिव के प्रतीक स्वरूप विशेष सम्मान के साथ विभिन्न धार्मिक स्थलों तक ले जाया जाता है। इस वर्ष 12 अगस्त को छड़ी मुबारक को श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर ले जाया जाएगा, जहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। इसके अगले दिन 13 अगस्त को इसे शारिका भवानी मंदिर ले जाने का कार्यक्रम है। इन अनुष्ठानों के माध्यम से पवित्र छड़ी की गुफा यात्रा से पहले धार्मिक परंपराओं को विधिवत पूरा किया जाएगा।
15 अगस्त को दशनामी अखाड़े में होगी छड़ी स्थापना
पवित्र छड़ी की अनुष्ठानिक यात्रा के क्रम में 15 अगस्त को श्री अमरेश्वर मंदिर दशनामी अखाड़ा, श्रीनगर में ‘छड़ी स्थापना’ का आयोजन किया जाएगा। यह अनुष्ठान अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पहुंचने वाली अंतिम धार्मिक यात्रा की तैयारियों का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसके बाद नाग पंचमी के अवसर पर 17 अगस्त को दशनामी अखाड़ा परिसर में पारंपरिक छड़ी-पूजन किया जाएगा। महंत दीपेंद्री गिरि के अनुसार, इन सभी धार्मिक आयोजनों के बाद पवित्र छड़ी को अमरनाथ गुफा की ओर ले जाने की तैयारियां पूरी होंगी। इस दौरान श्रद्धालुओं और साधु-संतों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है।
22 अगस्त से शुरू होगी मुख्य तीर्थ यात्रा
पवित्र छड़ी 22 अगस्त को अमरनाथ तीर्थ के मुख्य मार्ग पर अपनी यात्रा शुरू करेगी। यह यात्रा दक्षिण कश्मीर हिमालय के दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्र से होकर पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार 22 और 23 अगस्त को पहलगाम में रात्रि विश्राम होगा, जबकि 24 अगस्त को यात्रा चंदनवारी पहुंचेगी। इसके बाद 25 अगस्त को शेषनाग में पड़ाव रहेगा। 26 और 27 अगस्त को क्रमशः पंचतरणी में रात्रि विश्राम के बाद छड़ी मुबारक को अंतिम चरण में पवित्र गुफा की ओर ले जाया जाएगा। इस पारंपरिक मार्ग में प्राकृतिक कठिनाइयों के साथ धार्मिक आस्था का गहरा जुड़ाव देखने को मिलता है।
28 अगस्त को पवित्र गुफा में विशेष पूजा-अर्चना
छड़ी मुबारक की इस धार्मिक यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 28 अगस्त होगा, जब श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र अमरनाथ गुफा में पूजा-अर्चना और दर्शन किए जाएंगे। अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिमलिंग को भगवान शिव का स्वरूप मानकर श्रद्धालु पूजा करते हैं। छड़ी मुबारक का गुफा तक पहुंचना इस वार्षिक धार्मिक परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रावण पूर्णिमा के दिन होने वाला विशेष पूजन इस यात्रा को आध्यात्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बना देता है तथा इसके साथ अमरनाथ यात्रा की धार्मिक परंपराओं का प्रमुख चरण पूरा होता है।
‘छड़ी मुबारक’ से जुड़ी है सदियों पुरानी आस्था
भगवान शिव की पवित्र छड़ी ‘छड़ी मुबारक’ अमरनाथ तीर्थ की धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। साधु-संतों की अगुवाई में होने वाली इस यात्रा में छड़ी को अत्यंत श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ आगे बढ़ाया जाता है। यह केवल एक धार्मिक प्रतीक की यात्रा नहीं बल्कि कश्मीर की प्राचीन तीर्थ परंपरा, साधु परंपरा और शिवभक्ति के संगम का प्रतीक भी मानी जाती है। यात्रा के अलग-अलग पड़ावों पर होने वाले अनुष्ठान इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि अमरनाथ यात्रा के अंतिम धार्मिक चरण पर देशभर के श्रद्धालुओं की विशेष नजर रहती है।
दोनों मार्गों की मरम्मत के कारण यात्रा प्रभावित
इस बीच अमरनाथ गुफा की ओर जाने वाले दोनों प्रमुख मार्गों की मरम्मत और आवश्यक कार्यों के चलते नियमित अमरनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने की घोषणा अधिकारियों ने की थी। पहलगाम और बालटाल की ओर से जाने वाले मार्ग ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं, जहां मौसम और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों के कारण मार्गों के रखरखाव की आवश्यकता बनी रहती है। ऐसे में यात्रा मार्गों की मरम्मत का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित बनाना और आगामी धार्मिक कार्यक्रमों के लिए रास्तों को व्यवस्थित करना है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए मौसम की चुनौती के बीच मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।
श्रावण पूर्णिमा पर पूरी होगी छड़ी की आध्यात्मिक यात्रा
छड़ी मुबारक की यात्रा के साथ अमरनाथ धाम की धार्मिक परंपरा अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचती है। शंकराचार्य मंदिर से शुरू होकर शारिका भवानी मंदिर, दशनामी अखाड़ा, पहलगाम, चंदनवारी, शेषनाग और पंचतरणी से गुजरती हुई यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त को अमरनाथ गुफा में पूजा के साथ पूर्ण होगी। इस पूरी यात्रा में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कठिन हिमालयी भूभाग को पार करने की साधना भी जुड़ी हुई है। यही विशेषता अमरनाथ की छड़ी यात्रा को देश की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में अलग पहचान देती है और हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए इसे आस्था का विशेष केंद्र बनाती है।