नई दिल्ली - दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जवाबदेही तय करने की शुरुआत उनके इस्तीफे से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
प्रियंका गांधी ने उठाए युवाओं की आवाज के सवाल
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुद्दा विपक्ष की बात सुनने का नहीं, बल्कि करोड़ों छात्रों की आवाज सुनने का है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
केजरीवाल ने CBI जांच पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि 2024 NEET पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड को CBI अदालत में निर्दोष बता रही है, तो केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसियां मजबूत सबूत ही पेश नहीं करेंगी, तो दोषियों को सजा दिलाना मुश्किल होगा और छात्रों का भरोसा बहाल नहीं हो सकेगा।
राहुल गांधी ने संसद में बोलने का मौका न मिलने का लगाया आरोप
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद की कार्यवाही को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सामान्य संसदीय परंपरा के अनुसार यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो उसे जवाब देने का अवसर दिया जाना चाहिए, लेकिन उन्हें बोलने से पहले ही माइक बंद कर दिया गया। राहुल गांधी ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और कठोर बनाने की तैयारी कर रही है। यह कानून 21 जून 2024 से लागू है, लेकिन अब इसमें कई महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इन संशोधनों को मंजूरी मिल सकती है। प्रस्तावित बदलावों में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन, अदालतों को अतिरिक्त अधिकार, सजा और जुर्माने में वृद्धि जैसे प्रावधान शामिल हैं।
बढ़ सकती है सजा और जुर्माना
मौजूदा कानून के तहत व्यक्तिगत मामलों में 3 से 5 वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं सर्विस प्रोवाइडर पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। सरकार अब इन दंडों को और कठोर बनाने पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।